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पत्थरबाजी जम्मू कश्मीर के लिए बहुत बड़ी समस्या बन चुकी है, लेकिन इस साल सुरक्षाबलों ने उस पर काबू पानी में काफी हद तक कामयाबी हासिल की है.पिछले साल के मुकाबले इस साल घाटी में पत्थरबाजी की आधी से भी कम हुई हैं. गृह मंत्रालय ने राज्यसभा में इस बात की जानकारी दी.
मंत्रालय के मुताबिक पिछले साल 2016 में पत्थरबाजी की घटनाएं 2808 थी जबकि इस साल नवंबर तक वह घटकर अब तक केवल 1198 ही रह गई है यानी ऐसी घटनाओं का आंकड़ा आधे से भी ज्यादा कम हो गया है
इस साल पत्थरबाजी से निपटने के लिए सुरक्षा बलों ने काफी तैयारी कर ली थी, नए तरीके अपनाए थे, सुरक्षा की तैनाती की जगहों को बढ़ाया गया था और पत्थरबाजों से निपटने की रणनीति पर पुख्ता तरीके से काम किया गया था. पैलेट गन के अलावा अलग अलग तरीके की कम घातक बंदूके भी इस्तेमाल की गई थी पत्थरबाजों से निपटने के लिए. जिला में अलगाववादियों पर कार्रवाई और लगातार सेना द्वारा आतंकियों के सफाई के अभियान में भी आंकड़े को घटाने में काफी अहम भूमिका अदा की है.सुरक्षा विशेषज्ञ जे पी सिन्हा का कहना है 2016 की घटनाओं के बाद से काफी ज्यादा सबक लिया हमारे देश की सुरक्षा एजेंसियों ने, और उसका नतीजा इस साल देखने को मिला जब एक ओर घाटी के जंगलों में सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों को नेस्तनाबूत करना शुरु कर दिया तो दूसरी ओर सरकार की सॉफ्ट पॉलिसी जनता के बीच जाकर जगह बना रही थी. गरबा जी की घटनाओं के अलावा सुरक्षाबलों को भी बहुत कम नुकसान पहुंचा है इस साल प्रदर्शनों के दौरान
सरकार का दावा है कि आने वाले दिनों में इसी तरीके से पत्थरबाजों पर काबू करने की रणनीति पर काम चलता रहेगा और पूरी कोशिश की जाएगी कि कश्मीर के युवाओं को मुख्यधारा में लाकर जोड़ा जाए.
Article source: http://www.jagran.com/delhi/new-delhi-city-16489089.html
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