Monday, 30 April 2018

'हर गांव में बिजली' के दावे को लेकर आलोचना पर सरकार ने दिया ये जवाब


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देश के सभी गांवों में बिजली पहुंचने की घोषणा को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से अगले दिन ही सफाई जारी की गई. सरकार की तरफ से कहा गया कि ग्रामीण इलाकों के 80 फीसदी से ज्यादा घरों में बिजली पहुंच गई है.विद्युत मंत्रालय की ओर से सोमवार शाम जारी इस स्पष्टीकरण में साथ ही बताया गया कि किसी गांव को विद्युतीकृत घोषित करने के लिए 10 फीसदी घरों में बिजली होना ही जरूरी होता है.


पीएम मोदी के इस दावे को लेकर विपक्षी कांग्रेस की तरफ से काफी आलोचना की गई. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पी. चिदंबरम ने तो इसे पीएम मोदी का एक और ‘जुमला’ करार दिया. उन्होंने कहा कि 5.80 लाख गांवों में पहले की सरकारों के समय ही बिजली पहुंच चुकी थी और प्रधानमंत्री दावा कर रहे हैं कि उनके समय सभी गांवों में बिजली पहुंचाई गई.वहीं इस मामले में विद्युत मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि विद्युतीकृत गांव की यह परिभाषा विरासत से मिला है. इसके तहत 10 प्रतिशत विद्युतीकृत घरों वाले गांव को विद्युतीकृत गांव कहा जाता है.


विद्युत मंत्रालय ने कहा कि अगर परिभाषा ही कारण होती तो घरेलू विद्युतीकरण के इस स्तर को प्राप्त नहीं किया जा सकता था. देश के विभिन्न राज्यों व क्षेत्रों में विद्युतीकरण स्तर का यह अंतर प्राथमिक रूप से आकार, भौगोलिक विषमता, संसाधन आदि कारकों पर आधारित है और इन कारणों में राज्यों द्वारा ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए किए गए प्रयास भी शामिल हैं.


इसमें कहा गया है, ‘सरकार इस विरोधाभास से बाहर आ चुकी है और उसने 31 दिसंबर 2018 तक सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ‘प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना-सौभाग्य’ योजना का शुभारंभ किया है. ऐसे में मौजूदा परिदृश्य में ग्रामीण विद्युतीकरण की परिभाषा पर आधारित बहस अपना महत्व खो चुकी है.’

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