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जम्मू और कश्मीर के युवाओं में आईएएस और आईपीएस बनने की बहुत योग्यता है. हम परीक्षा पास करने वाले सभी युवाओं को नहीं ले सकते हैं. हमारी अपनी भी कुछ मजबूरी हैं. वर्ना ये जान लिजिए कि हमारे मापदण्ड पर आने वाला दूसरे क्षेत्र का टॉपर जम्मू-कश्मीर में बनी हमारी लिस्ट के 33वें उम्मीदवार से कमजोर है. ये कहना है जक़ात फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. सैय्यद जफर महमूद का.आपको बता दें कि जक़ात फाउंडेशन सिविल सर्विस की तैयार करने वाले बच्चों की मदद करती है. इसके लिए फाउंडेशन सिविल सर्विस की प्री परीक्षा के बराबर एक लिखित परीक्षा और इंटरव्यू आयोजित करती है. न्यूज18 हिन्दी से खासबीत में डॉ. जफर ने बताया कि ‘इस बार जम्मू-कश्मीर से 250 लड़के-लड़कियों ने हमारी परीक्षा में हिस्सा लिया था. जिसमे से 33 बच्चे इंटरव्यू के लिए बुलाए गए थे.
हमने सभी के इंटरव्यू लिए. 33 बच्चों में से कोई भी ऐसा नहीं था कि जिसे हम पीछे छोड़ दें और उसे सिविल सर्विस की तैयारी में मदद न करें. लेकिन हमारे संसाधन सीमित हैं, इसलिए सभी को लेना मुमकिन नहीं है. हम आमतौर पर हर साल जम्मू-कश्मीर से 10 से 12 युवाओं को तैयारी कराते हैं.’
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मां-बाप को समझा दो, मैं भी आईएएस बनना चाहती हूंडॉ. जफर बताते हैं कि कई बार लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के दौरान लड़कियां भी हमसे संपर्क करती हैं. उनका कहना ये होता है कि हम भी सिविल सर्विस की तैयारी करना चाहते हैं, लेकिन हमारे मां-बाप से हमे इजाजत दिलवा दो. ऐसे ही कुछ किस्से उन्होंने जम्मू-कश्मीर के भी बताए.
कोचिंग के लिए मुम्बई से इंटरव्यू देने आई है सालिहा
नए बैच के लिए जक़ात फाउंडेशन में लिखित परीक्षा के बाद अब इंटरव्यू का दौर चल रहा है. इंटरव्यू देने के लिए आई ऐसी ही एक छात्रा सालिहा से बात की न्यूज18 हिन्दी ने. बातचीत में सालिहा ने बताया कि वह मुम्बई में रहती है. पढ़ाई भी वहीं से की है. लेकिन अब सिविल सर्विस की तैयारी करना चाहती है. इसके लिए जक़ात की मदद पाने के लिए कोशिश कर रही है.
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