Friday, 27 April 2018

गिर रही है धार्मिक स्वतंत्रता, अफगानिस्तान और इराक के साथ एक पायदान पर खड़ा है भारतः रिपोर्ट


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अमेरिकी सरकार द्वारा गठित एक आयोग ने आरोप लगाया है कि भारत में पिछले साल धार्मिक स्वतंत्रता की स्थितियों में गिरावट जारी रही और हिंदू राष्ट्रवादी समूहों ने गैर हिंदुओं और हिंदू दलितों के खिलाफ हिंसा, धमकी और उत्पीड़न का प्रयोग करके देश का भगवाकरण की कोशिश की.यूएस कमीशन फॉर इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में भारत को अफगानिस्तान, अजरबैजान, बहरीन, क्यूबा, मिस्र, इंडोनेशिया, इराक, कजाकिस्तान, लाओस, मलेशिया और तुर्की के साथ खास चिंता वाले टीयर टू देशों में रखा है.


यूएससीआईआरएफ ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), विश्व हिंदू परिषद जैसे हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों द्वारा गैर हिंदुओं और हिंदुओं के अंदर निचली जातियों को अलग – थलग करने के लिए चलाए गए अभियान के चलते धार्मिक अल्पसंख्यकों की दशाएं पिछले दशक के दौरान बिगड़ी हैं.’’


अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अभियान के शिकार मुसलमान, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और दलित हिंदू हैं. उसने कहा, ‘‘ये समूह अपने विरुद्ध हिंसक कार्रवाई, धमकी से लेकर राजनीतिक ताकत के हाथ से चले जाने तथा मताधिकार छिन जाने की बढ़ती भावना से जूझ रहे हैं. भारत में 2017 धार्मिक स्वतंत्रता की स्थितियों में गिरावट जारी रही.’’यूएससीआईआरएफ ने कहा, ‘‘कई संस्कृतियों और कई धर्मों वाले समाज के रूप में भारत का इतिहास धर्म पर आधारित राष्ट्रीय पहचान की बढ़ती अवधारणा के खतरे से घिर गया है. इस साल के दौरान हिंदू राष्ट्रवादी समूहों ने गैर हिंदुओं और हिंदू दलितों के विरुद्ध हिंसा, धमकी और उत्पीड़न के माध्यम से देश का भगवाकरण करने की कोशिश की.’’


रिपोर्ट के अनुसार गौरक्षकों की भीड़ ने वर्ष 2017 में कम से कम 10 लोगों की हत्या कर दी. घर वापसी के माध्यम से गैर हिंदुओं को बलात हिंदू बनाने की खबरें सामने आईं. धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ भेदभाव के तौर पर विदेशी चंदा वाले एनजीओ पर पंजीकरण नियमों का बेजा इस्तेमाल किया गया.


रिपोर्ट कहती है कि पिछले साल धार्मिक स्वतंत्रता की दशाएं बिगड़ने के साथ ही कुछ सकारात्मक बातें हुई. सुप्रीम कोर्ट ने कई ऐसे निर्णय लिए जिससे धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा हुई.


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