Monday, 30 April 2018

हिज्बुल के पोस्टर ब्वॉय समीर टाइगर की मौत उसे जंगल से खींच लाई...!


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कश्मीर के घने जंगलों में महीनों तक छुपे रहने के बाद 20 वर्षीय समीर उस जगह लौटा, जहां का वह बाशिंदा था और जहां उसका अपना घर था, लेकिन वहां उसकी मुलाकात मौत से हो गई.अधिकारियों ने बताया कि समीर अहमद भट उर्फ समीर टाइगर हिज्बुल मुजाहिदीन में भर्ती होने वाला मुख्य शख्स था. पुलवामा के द्राबगाम में सुरक्षा बलों ने एक मुठभेड़ में उसे मार गिराया. यही गांव ही उसका घर था. उन्होंने बताया कि समीर को अब्बासी और फैसल जैसे अलग-अलग नामों से भी जाना जाता था. गांव में छह घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद दोपहर करीब सवा दो बजे उसे मार गिराया गया.


सुरक्षा बलों को एक घर में आतंकियों के छुपे होने की पुख्ता सूचना मिली थी जिसके बाद उन्होंने उस घर को घेर लिया. अधिकारियों ने बताया कि नागरिकों की ओर से पथराव का भी सामना कर रहे सुरक्षा बलों ने घर पर भारी गोलीबारी की जिससे उसमें विस्फोट हो गया. एक घंटे के बाद आकीब मुश्ताक नाम का पहला आतंकवादी मारा गया. वह एक स्थानीय निवासी था. आकीब का ताल्लुक पुलवामा के राजपुरा से था.


उन्होंने बताया कि इसके कुछ देर बाद, समीर को भी मार गिराया गया. उसपर पुलवामा में कई नेताओं और नागरिकों का कत्ल करने का आरोप है.समीर नवम्बर 2017 में उस वक्त राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था जब दक्षिण कश्मीर के किसी बगीचे में खींचे एक फोटो में वह अमेरिकी एम 4 कार्बाइन थामे हुए दिखा था. इसके बाद यह चर्चा छिड़ गई थी कि अमेरिका में बना हथियार घाटी कैसे पहुंचा. तस्वीर को सोशल मीडिया पर खूब साझा किया गया था.


अधिकारियों ने बताया कि समूची कश्मीर घाटी को आतंकित करने वाले इस युवक ने पत्थरबाज के तौर पर शुरूआत की थी. आठवीं कक्षा में ही पढ़ाई छोड़ने वाला समीर जुलाई 2016 में बुरहान वानी की मौत के बाद हिज्बुल मुजाहिदीन के पोस्टर ब्वॉय के तौर पर उभरा था.


वानी की मौत से करीब तीन महीने पहले मार्च 2016 में समीर को जम्मू कश्मीर पुलिस ने सुरक्षा कर्मियों पर पथराव करने के मामले में हिरासत में लिया था. उस वक्त वह महज 18 साल का था.


अधिकारियों ने बताया कि उस समय पुलिस ने तकरीबन दो हफ्तों तक उसकी काउंसलिंग कराई थी और उसे इस शर्त पर छोड़ दिया था कि वह अपनी पढ़ाई फिर शुरू करेगा. इसके कुछ दिन बाद ही उसके मात-पिता द्राबगाम थाने पहुंचे और अपने बेटे के लापता होने के बारे में शिकायत दर्ज कराई.


समीर त्राल से सटे जंगलों में भाग गया था और आतंकवादी समूह हिज्बुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया था. उसने साथ में अन्य आतंकी समूहों की भी मदद की थी.


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