Monday, 30 April 2018

येदियुरप्पा की जीत पक्की, लेकिन इन सीटों पर बीजेपी की हालत खराब


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(डीपी सतीश)अम्बीगोला गांव के एक खेती मज़दूर गोजा का कहना है कि शिकारीपुरा में कोई चुनाव नहीं है. उन्हें लगता है कि इस बार चुनाव में कोई प्रतियोगिता नहीं है और बीएस येदियुरप्पा आठवीं बार भी आसानी से जीत जाएंगे.


News18 से बातचीत में उन्होंने बताया, “राज्य के दूसरे हिस्से के बारे में मुझे नहीं मालूम. यहां वो ही जीतेंगे. कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) ने भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं, लेकिन हम उन्हें जानते तक नहीं हैं. येदियुरप्पा ने पिछले 35 वर्षों में शिकारीपुरा के लिए काफी कुछ किया है.”


येदियुरप्पा की ‘विजयगाथा’ की कुछ ऐसी ही चर्चा शिमोगा जिले में भी है. जिसने भी News18 से बात की, उसने यह माना कि शिमोगा के बाकी हिस्से में जो चाहे हो, लेकिन यहां येदियुरप्पा ही जीतेंगे.बता दें कि कांग्रेस ने येदियुरप्पा के खिलाफ एक स्थानीय नगर पालिका सदस्य गोनी मलातेश और जेडीएस ने बालीगर को उतारा है.


यही नहीं, कुछ अनुभवी कांग्रेस नेताओं नेताओं का भी मानना है कि इस सीट से येदियुरप्पा ही जीतेंगे. वहीं कुछ नेता ‘एडजस्टमेंट’ थ्योरी की चर्चा भी कर रहे हैं. उनके मुताबिक, येदियुरप्पा की जीत पक्की करने के लिए खुद कांग्रेस ने उनके खिलाफ हल्के उम्मीदवार उतारे हैं. अगर बीजेपी हारती है तो भी येदियुरप्पा राजनीति में सक्रिय रहें.


हालांकि, शिमोगा जिले के कांग्रेस अध्यक्ष टीएन श्रीनिवास इन कॉन्स्पिरेसी थ्योरीज को बकवास बताते हैं, उनके मुताबिक, ये कुछ नाकारा लोगों की कल्पना है. स्थानीय बीजेपी यूनिट ने भी इस तरह के कथित दावों का खंडन किया है.


जहां एक ओर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया चामुंडेश्वरी और बादामी सीट से लड़ रहे हैं, वहीं येदियुरप्पा अपने मजबूत गढ़ से खड़े हुए हैं और ज्यादातर वक्त प्रचार में गुजार रहे हैं. उनके बेटे और एमएलए बीवाई राघवेंद्र पिता के प्रचार में मदद कर रहे हैं और बड़ी जीत को लेकर आश्वस्त हैं.


उन्होंने News18 को बताया, “शिकारपुरा में चुनाव सिर्फ एक औचारिकता है और येदियुरप्पा 50,000 से ज्यादा वोटों से जीतेंगे. इस सीट में ज्यादातर वोट लिंगायतों के हैं और उन्होंने 1983 से 1999 तक उन्हें समर्थन दिया है.


हालांकि, शिमोगा की बाकी छह सीटों पर बीजेपी के लिए स्थिति उतनी ‘मखमली’ नहीं है और पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक येदियुरप्पा इसे लेकर चिंतित भी हैं.


उनके शागिर्द रह चुके (बाद में बगावती) केएस ईश्वरप्पा को येदियुरप्पा की मर्जी के खिलाफ शिमोगा सिटी से टिकट मिला है. ईश्वरप्पा, 2013 में कांग्रेस के केबी प्रसन्नकुमार से हार गए थे.


शिमोगा सिटी एक मुस्लिम और ब्राह्मण बहुल सीट है और प्रसन्नकुमार ब्राह्मण हैं. एक स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता रमेश ने बताया कि दोनों ही समुदाय के ज्यादातर लोग उनसे नाखुश हैं, लेकिन वे सिर्फ इसलिए जीत सकते हैं क्योंकि मुस्लिमों और ब्राह्मणों के ज्यादातर वोट उन्हें ही जाएंगे.


रमेश ने कहा, “दोनों के मिलाकर करीब एक लाख वोट होते हैं. ईश्वरप्पा कुरुबा हैं और उनके पास 20,000 अतिरिक्त वोट हैं. वहीं जेडीएस उम्मीदवार लिंगायत है. लिंगायत ईश्वरप्पा से खुश नहीं हैं और उन्हें मुश्किल हो सकती है.”


ईश्वरप्पा कई बार येदियुरप्पा से उनके लिए प्रचार करने की अपील कर चुके हैं और बीजेपी सीएम उम्मीदवार ने उनकी बात मान भी ली है.


सागर चुनावी सीट से कांग्रेस ने 86 वर्षीय रेवेन्यु मिनिस्टर कगोडू थिमप्पा को दुबारा टिकट दी है. यहां बीजेपी ने उनके खिलाफ हरतालू हलप्पा को खड़ा किया है, जिनपर रेप का कथित आरोप भी है. हालांकि, इससे बीजेपी एमएलए गोपालकृष्णा नाराज हैं.


एक स्थानीय कांग्रेस नेता डीएन प्रसन्ना ने बताया, “अगर बीजेपी ने गोपालकृष्णा को मैदान में उतारा होता तो यहां बड़ी लड़ाई होती. हलप्पा का कगोडू से कोई मुकाबला नहीं है. हमें सागर सीट से आसान जीत की उम्मीद है है.”


लेकिन हलप्पा को भी अपनी जीत का पूरा विश्वास है. उन्होंने News18 से बताया, “मैं एक विकास चाहने वाला नेता हूं. मुझे सभा जातियों का समर्थन प्राप्त है. मैं ही जीतूंगा.”


तीर्थल्ली सीट पर कांग्रेस ने किम्माने रत्नाकर को दुबारा उम्मीदवार बनाया है. वहीं बीजेपी ने पूर्व एमएलए अरागा जनेंद्र और जेडीएस ने कथित घपलेबाज आरएम मंजूनाथ गौड़ा को मैदान में उतारा है. स्थानीय लोगों का मानना है कि असल मुकाबला कांग्रेस और जेडीएस के बीच होगा.


एक स्थानीय कांग्रेस नेता लक्ष्मीनारायण ने बताया, “बीजेपी का नंबर तीसरा है. उनका उम्मीदवार नहीं जीतेगा. रत्नाकर अच्छे व्यक्ति हैं और वे दुबारा ज़रूर जीतेंगे.”


वहीं स्थानीय बीजेपी नेताओं को भी उनके उम्मीदवार के जीतने की कोई उम्मीद नहीं हैं. शिकारीपुरा के नजदीक सोराबा में दिवंगत मुख्यमंत्री एस बंगारप्पा के दोनों बेटे एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं.


एमएलए मधू बंगारप्पा जेडीएस की टिकट पर खड़े हुए हैं, जबकि उनके बड़े भाई और पूर्व मंत्री कुमार बंगारप्पा बीजेपी की टिकट पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. यहां कांग्रेस ने इन दोनों भाइयों के सामने थल्लूर राजा को मैदान में उतारा है.


शिमोगा रूरल में तीनों पार्टियों के उम्मीदवार अपनी जीत का दावा कर रहे हैं. जेडीएस से शारदा पूर्यनायक का दावा है कि वे आसानी से जीत जाएंगी, जबकि बीजेपी उम्मीदवार को 50,000 सीटों से जीत की उम्मीद है.


कर्नाटक के स्टील टाउन भद्रावती से जेडीएस एमएलए अप्पाजी गौड़ा और पूर्व कांग्रेस एमएलए बीके संगामेश्वर एक बार फिर मुकाबला कर रहे हैं.


येदियुरप्पा को उम्मीद है कि शिमोगा जिले के लोग बीजेपी की खातिर उन्हें वोट देंगे और वे अगले मुख्यमंत्री होंगे.


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