Monday, 30 April 2018

Manna Dey Special : दुनिया मन्ना डे के गानों की फैन थी और वो खुद राजेश खन्ना के


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लीजेंड्री प्लेबैक सिंगर मन्ना डे का आज जन्मदिन है. 1 मई 1919 को पैदा हुए मन्ना डे का असली नाम प्रबोध चंद्र डे था. वो एक ऐसे गायक थे जिन्होंने हिंदी के अलावा कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी हिट गाने दिए. बंगाली ​फिल्मों में गाए उनके गीत काफी पसंद किए गए. पॉपुलर संगीत के फैन्स सिर्फ किशोर-रफी-मुकेश की बातें करते हैं लेकिन मोहम्मद रफी खुद मानते थे कि वो मन्ना डे के फैन रहे.साल 1942 में फिल्म तमन्ना से हिंदी फिल्मों में अपनी शुरुआत करने वाले मन्ना डे को एस डी बर्मन के कंपोज किए गाने ‘ऊपर गगन विशाल’ से असली लोकप्रियता मिली और इसके बाद साल 2013 तक उनका सफर जारी रहा. इस बीच उन्होंने 4,000 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए जिनमें से किसी भी गीत को कम आंकना मुश्किल है. लेकिन यहां हम आपके लिए मन्ना डे के वो गीत लाए हैं जिन्हें सुनकर आप समझ पाएंगे वो क्यों कालजयी हैं और रहेंगे


साल 1971 में पद्म श्री, साल 2005 में पद्म भूषण और साल 2007 में दादा फाल्के पुरस्कार से सम्मानित मन्ना डे के इस गीत को 1955 की फिल्म सीमा में लिया गया था. बलराज साहनी पर फिल्माए इस गीत के बोल लिखे थे शैलेंद्र ने और इसके गीतकार रहे शंकर जयकिशन.


फिल्म श्री 420 का ये गाना मन्ना डे और लता मंगेशकर ने गाया था जिसे न​रगिस और राज कपूर पर फिल्माया गया था. बॉलीवुड के इस लैंडमार्क गीत को हर अवॉर्ड फंक्शन में याद किया जाता है. जानकार बताते हैं कि राजकपूर आमतौर पर मुकेश की आवाज़ को अपनी फिल्मों में लिया करते थे लेकिन इस गीत में मन्ना डे की आवाज़ उनके उपर खूब फबी.


फिल्म चोरी चोरी का ये गीत राज कपूर और नरगिस पर फिल्माया गया था. 1956 में आई इस फ़िल्म का संगीत शंकर जयकिशन की जोड़ी ने दिया था और इस फिल्म के गीतों के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला था. इस फिल्म का एक और लोकप्रिय गीत ‘आजा सनम, मधुर चांदनी में हम’ भी लता मंगेशकर और मन्ना डे ने ही गाया था.


फिल्म वक्त के इस गाने के बारे में कहा जाता है कि ये आज तक का सबसे बेहतरीन लिप सिंक है. फिल्म में एक बार भी ऐसा नहीं लगता कि बलराज साहनी इस गीत को नहीं गा रहे हैं. इस गाने को कंपोज़ अफगानी गीतकार अब्दुल गफूर ब्रेशना ने किया था बल्कि फिल्म के अन्य गाने गीतकार रवि ने बनाए थे.


मन्ना डे राजेश खन्ना के फैन थे. उन्होंने कहा था, ‘राजेश खन्ना जिस तरह म्यूजिक को पिक्चराइज करते हैं वो मुझे बहुत पसंद है. गाने की सफलता इस पर निर्भर करती है कि एक एक्टर उसे किस तरह पिक्चराइज करता है. गानों को पिक्चराइज करने में राजेश खन्ना नंबर वन है. मैं हमेशा उनका एहसानमंद रहूंगा.’ आनंद का ये गीत राजेश खन्ना पर फिल्माया गया था. गाना जितना खूबसूरत था इसकी पिक्चराइजेशन भी उतनी ही अच्छी थी.


उपकार के इस गीत को प्राण पर फिल्माया गया था. मन्ना डे की आवाज में प्राण के किरदार का दर्द साफ झलकता है. इस गीत के बारे में मशहूर है कि इंदीवर ने जब इस गीत को लिखा और इस गाने मेें सुर किसके लिए जाएं, इस बारे में पूछा तो फिल्म के हीरो मनोज कुमार ने मन्ना डे के नाम की ज़िद पकड़ ली.


हिंदी फिल्मों में कई खूबसूरत गानों को आवाज देने वाले मशहूर गायक मोहम्म्द रफी ने कभी कहा था कि लोग मेरे गाने सुनते हैं और मैं मन्ना डे को सुनता हूं.फिल्म पड़ोसन के इस गाने को मन्ना​ डे ने किशोर कुमार और महमूद के साथ गाया था और आर डी बर्मन का बनाया यह गाना बॉलीवुड के संगीत इतिहास का अमर गाना है.


मेरा नाम जोकर के इस गाने की कहानी बेहद दिलचस्प है. इस फिल्म में राज कपूर पर फिल्माए सभी गाने मुकेश ने गाए हैं लेकिन सिर्फ यही एक गाना मन्ना डे ने गाया है. इस गाने के मूड के चलते शंकर जयकिशन ने इस गीत के लिए मन्ना डे के नाम की सिफारिश की और फिल्म में मुकेश के पाँच गाने होने के बाद भी मन्ना डे के इस गीत को फिल्मफेयर का बेस्ट प्लेबैक सिंगर पुरस्कार मिला.


तीसरी कसम फिल्म के गीत राज कपूर के दिल के बेहद करीब थे और लोक संगीत पर आधारित चलत मुसाफिर भी उनके पसंदीदा गानों में से एक है. 1966 में रिलीज़ हुई इस फिल्म का संगीत शंकर जयकिशन ने दिया है और इस गाने के फिल्मी बोल शैलेंद्र ने लिखे हैं


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