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2019 लोकसभा चुनावों के लिए अखिलेश की सपा और मायावती की बसपा के साथ आने के बाद अब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी इनसे निपटने के लिए कमर कस ली है. सपा के ओबीसी वोट बैंक और माया के दलित वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए योगी सरकार नया प्लान लेकर आई है. असल में बीजेपी के सामने ये साफ़ है कि 2014 के अपने सबसे अच्छे प्रदर्शन में भी उसके हिस्से सिर्फ 39% वोट आए थे लेकिन अपने सबसे बुरे प्रदर्शन के दौरान भी माया-अखिलेश का साझा वोट बैंक कभी 45% से नीचे नहीं गया है. ऐसे में योगी की नज़र सपा से नाराज़ OBC जातियों और बसपा से नाराज़ अनुसूचित वर्ग में आने वाली जातियों पर है.क्या है योगी का नया प्लान
योगी सरकार जल्द ही OBC के 27% आरक्षण को तीन अलग-अलग कैटेगरी में बांटने की तैयारी में है. योगी के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने News18Hindi से ख़ास बातचीत में बताया कि OBC रिजर्वेशन को तीन हिस्सों में बांटने का मसौदा उनकी ही देख-रेख में तैयार किया गया है. पिछड़ी जातियों को तीन वर्गों में विभाजित किया जाना प्रस्तावित है- पिछड़ी जातियां, अति-पिछड़ी जातियां और अत्याधिक पिछड़ी जातियां.
राजभर के मुताबिक OBC रिजर्वेशन का फायदा कुछ ख़ास जातियों को मिला है और करीब 67 पिछड़ी जातियां ऐसी हैं जिन्हें इस रिजर्वेशन से कोई फायदा ही नहीं मिला है. तीन हिस्सों में आरक्षण को बांटकर ये तय किया जाएगा कि ओबीसी में शामिल किस ख़ास जाति को उसकी आबादी की हिस्सेदारी से ज्यादा आरक्षण का फायदा मिलता रहा है.
पिछड़ी जातियों के तहत उन्हें रखा जाएगा जिन्हें आबादी के मुकाबले ज्यादा रिजर्वेशन मिल चुका है, अति-पिछड़ा में उन जातियों को रखा जाएगा जिन्हें आबादी के मुकाबले आरक्षण का फायदा बेहद कम मिला है. सर्वाधिक पिछड़ा में उन जातियों को रखा गया है जिन्हें OBC रिजर्वेशन का फायदा बिलकुल ही नहीं मिला है. बता दें कि उत्तराखंड विभाजन के बाद यूपी में अनूसूचित जनजातियों की संख्या भी 2% से घटकर 0.06% हो गयी है. इसके चलते ST के हिस्से आने वाले 2% रिजर्वेशन को 1% कर बचा हुआ एक प्रतिशत सर्वाधिक पिछड़ा जातियों को दिया जाएगा.
क्या है फ़ॉर्मूला
OBC आरक्षण 27% + 1% अनुसूचित जनजातियों से वापस लिया आरक्षण
OBC कैटेगरी – रिजर्वेशन में हिस्सेदारी – जनसंख्या में हिस्सेदारी
पिछड़ी जातियां – 7% – 31.00%
अति- पिछड़ी जातियां- 8% – 28.48%
सर्वाधिक पिछड़ी जातियां- 13% – 40.52%

अखिलेश के दांव को योगी ने लपका
उधर योगी ने अखिलेश की माया के खिलाफ रही स्ट्रेटजी को अपने अमल में लाने की शुरुआत कर दी है. अखिलेश ने 17 ओबीसी जातियों को अनूसूचित जातियों में शामिल करने का दांव 2017 चुनावों से ठीक पहले दिसंबर 2016 में चला था हालांकि मामला केंद्र सरकार के पास ही अटका रह गया था. अब योगी सरकार को केंद्र से इस बाबत हरी झंडी मिल गयी है और आने वाले छह महीनों में ये काम पूरा हो जाएगा.

राजभर के मुताबिक उन्होंने केंद्र से इस बारे में बात की है और यूपी सरकार ने सपष्ट कर दिया है कि केंद्र अगर चाहे तो पुराने प्रस्ताव पर ही मंजूरी दे दे और अगर ऐसा न हो पाए तो उनके पास इसके लिए नया प्रस्ताव भी तैयार है. इन जातियों में कहार, निषाद, कुम्हार, धीवर, बिंद, बाथम, मांझी, मधुआरा, कश्यप, केवट, मल्लाह, तुरहा, भर, गोंड, प्रजापति, राजभर शामिल हैं.
फोकस है गैर-यादव और गैर-जाटव जातियों पर
2019 की लड़ाई के लिए बीजेपी के पास यूपी में गठबंधन का कोई विकल्प फिलहाल मौजूद नहीं है. ऐसे में सवाल पूछा जा रहा था कि 2019 में बीजेपी आखिर करेगी क्या ? इसलिए अब यूपी में सपा और बसपा का सामना करने के लिए उसके पास सिर्फ सोशल इंजीनियरिंग का विकल्प बचा है. सपा के मामले में बात करें तो यूपी के OBC वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा उसके पास आता है. इस वोट बैंक में 70 से 80 जातियां शामिल हैं जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा यादवों का है.

बीजेपी के पास एक ही ऑप्शन है कि वो सपा के हिस्से जाने वाली गैर-यादव जातियों को अपने पाले में ले आए. इसी तरह बसपा से निपटने के लिए दलित अंब्रेला में शामिल 40-50 जातियों में से गैर-जाटव जातियों को तोड़ ले. ये करने से सपा-बसपा का वोट शेयर कम हो सकता है जिसका सीधा फायदा बीजेपी को होना तय है. अगर ऐसा नहीं हो पाया तो 2019 में इस गठबंधन से लड़ना बेहद मुश्किल होगा.
‘माया-अखिलेश ने OBC और SC/ST में भेदभाव किया’
योगी सरकार का ये कदम जातीय राजनीति को बढ़ावा देगा इस सवाल के जवाब में राजभर कहते हैं कि हमें जिन लोगों ने चुनकर सत्ता में पहुंचाया है हम उनसे किए गए वादे निभा रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि माया और अखिलेश सरकार ने पहले से ही भेदभाव की शिकार अनूसूचित और पिछड़ी जातियों के भीतर ही भेदभाव पैदा करने का काम किया है. इन दोनों पार्टियों ने ही उन्हीं लोगों का शोषण किया जो इन्हें लगातार ईमानदारी से वोट करते रहे. कुछ विशेष जातियों को छोड़कर आरक्षण का लाभ किसी और को नहीं मिला, हमारी सरकार आरक्षण नीति में सुधार लाने की कोशिश कर रही है.
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