Sunday, 24 June 2018

ग्रामीण इलाकों में काम करती हैं देश की 80% महिलाएं, आधे से ज्यादा हैं अशिक्षित


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(रौनक कुमार गुंजन)देश के शहरी हिस्सों में रहने वाली महिलाएं, ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाओं की तुलना में ज्यादा घरेलू कामों में शामिल हैं. साल 2011 की जनगणना और हाल ही में नेशनल सैम्पल सर्वे के अनुसार, देश के कुल महिला कार्यबल का 81.29 फीसदी हिस्सा ग्राणीण महिलाओं का है. इस आंकड़े में सीमांत और मुख्य, दोनों तरह के कामगार शामिल हैं. जनगणना के मुताबिक, मुख्य मजदूर वह है जो साल के ज्यादातर समय काम करती हैं. इनमें से अधिकतर महिलाएं खेतिहर मजदूर है जो मजदूरी के बदले किसी और की जमीन पर काम करती हैं. दिलचस्प बात यह है कि ग्रामीण इलाकों में काम करने वाली करीब 56 फीसदी महिलाएं अशिक्षित हैं. वहीं शहरी इलाकों में काम करने वाली कुल महिलाओं में 28 फीसदी अशिक्षित हैं.


भारत ने महिला कार्यबल में भारी गिरावट देखी है. साल 2004-2005 और साल 2011-2012 के बीच 2 करोड़ महिलाओं ने काम छोड़ दिया जबकि सी अवधि के दौरान 2.4 करोड़ महिलाओं ने काम करना शुरू किया. कामकाजी उम्र की महिलाओं के लिए श्रम बल की भागीदारी दर साल1993-1994 में 42 फीसदी से घटकर साल 2011-2012 में 31 फीसदी हो गई.


लुइस ए एंड्रेस, बसब दासगुप्त, जॉर्ज जोसेफ, विनोज अब्राहम और मारिया द्वारा लिखे गए विश्व बैंक की एक स्टडी में कहा गया है, ‘यह चिंता का महत्वपूर्ण विषय है. भारत आर्थिक विकास को बढ़ाने और विकास को बढ़ावा देने के लिए खुद को तैयार करने की बात करता है इसलिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इसकी श्रम शक्ति में महिलाओं का समावेश हो.’ये भी पढ़ें: ठेले पर बेचती थी चाय-समोसे, मेहनत से चमकी किस्मत तो बन गई 14 रेस्तरां की मालकिन


अधिकतर लोगों कि राय है कि हो सकता है ग्रामीण इलाकों में शादी की वजह से महिलाएं काम छोड़ती हैं. आंकड़ों के अनुसार, विवाह ने गांवों में महिलाओं के बीच कार्यबल भागीदारी को प्रभावित नहीं किया. अविवाहित महिलाओं की तुलना में अधिक विवाहित महिलाएं इन क्षेत्रों में काम करती हैं.


वर्ल्ड बैंक के रिसर्च पेपर में दावा किया गया है कि 15-24 आयु वर्ग की ग्रामीण लड़कियों और महिलाओं के बीच भागीदारी दर में गिरावट के लिए माध्यमिक शिक्षा का हालिया विस्तार और तेजी से बदल रहे सामाजिक मानक जिम्मेदार हैं. रिसर्च पेपर में कहा गया है कि अधिकतर युवा महिलाएं काम करने की जगह अपनी पढ़ाई को प्राथमिकता दे रही हैं.


इसे ग्रामीण इलाकों में पढ़ने वाली महिलाओं की बढ़ती संख्या से समझा जा सकता है. हालांकि, काम करने की जगह पढ़ाई चुनना इस बात को सुनिश्चित नहीं करता कि महिलाएं इसके बाद काम करेंगी ही. नॉर्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी के एक रिसर्च पेपर में शोध करने वालों ने कहा है कि हाई स्कूल के स्तर की पढ़ाई करने वाली महिलाओं को काम करने के लिए बढ़ावा नहीं मिला.


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काम करने में शामिल होने वालों की दर उनमें सबसे कम पाई गई है, शहरों और गांवों में स्कूल गई हैं या हाई स्कूल की शिक्षा हासिल की है. जैसा की पहले बताया गया है कि अधिकतर महिलाएं जो ग्रामीण इलाकों में काम करती हैं वह अशिक्षित होती हैं.


एनएसएस के आंकड़ों से यह पता चलता है कि घरेलू मजदूरी में वृद्धि होने के चलते महिलाओं ने काम छोड़ा. मतलब, ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए काम करने के लिए धन की आवश्यकता ही एकमात्र वजह है. भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मुख्यमंत्रियों को एक पत्र में लिखा था ,’मैं इस बात से पूरी तह आश्वस्त हूं कि देश की प्रगति महिलाओं की स्थिति से जुड़ी हुई है.’


(यह स्टोरी News18 की स्पेशल सीरीज #onthejob का हिस्सा है.)


Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/desh/sanjeevni-booti-uttrakhand-government-502197.html

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