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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को आपातकाल की बरसी पर एक फेसबुक पोस्ट लिखी. इसमें उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और जर्मनी के चांसलर रहे एडोल्फ हिटलर की तुलना की है. उन्होंने आपातकाल पर लिखे अपने लेख के दूसरे हिस्से में लिखा है, ‘हिटलर और श्रीमती गांधी ने कभी भी संविधान को रद्द नहीं किया. उन्होंने लोकतंत्र को तानाशाही में बदलने के लिए एक गणतंत्र के संविधान का उपयोग किया.’जेटली ने लिखा, ‘हिटलर ने संसद के अधिकांश विपक्षी सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया और इसलिए, अल्पसंख्यक सरकार को संसद में एक सरकार में परिवर्तित कर दिया, जिसमें दो-तिहाई सदस्य उपस्थित थे और मतदान कर रहे थे. इसलिए, वह एक व्यक्ति में निहित सभी शक्तियों का संविधान संशोधन लाए. श्रीमती इंदिरा गांधी ने संसद के अधिकांश विपक्षी सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया और इसलिए, उनकी अनुपस्थिति के जरिए, सदस्यों के दो तिहाई बहुमत मौजूद और संविधान संशोधन के माध्यम से कई अप्रिय प्रावधानों को पारित करने में सक्षम किया.’
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अरुण जेटली ने लिखा है, ‘एक शक्ति जिसे डॉ अम्बेडकर ने कहा था कि वह भारत के संविधान का दिल और आत्मा है, उसे 42वें संशोधन के जरिए रिट पिटीशन जारी करने के लिए हाईकोर्ट्स की शक्ति को कम कर दिया गया. उन्होंने अनुच्छेद 368 में भी संशोधन किया ताकि एक संविधान संशोधन न्यायिक समीक्षा से परे हो.’जेटली ने लिखा है,’ऐसी कुछ चीजें थीं जिन्हें हिटलर ने नहीं किया था, श्रीमती गांधी ने किया था. उन्होंने मीडिया में संसदीय कार्यवाही के प्रकाशन पर रोक लगा दी. संसदीय कार्यवाही प्रकाशित करने के लिए मीडिया को अधिकार देने वाला कानून लोकप्रिय रूप से फिरोज गांधी विधेयक के रूप में जाना जाता था क्योंकि स्व. श्री फिरोज गांधी ने हरिदास मुंद्रा घोटाले के बाद उनके लिए एकमात्र प्रचार किया था, जिसे संसद में उनके द्वारा उठाया गया था. अगर हम हिटलर के चुनाव को किनारे रख दें तो भी उसने ऐसे कोई बदलाव नहीं किए थे. श्रीमती गांधी ने संविधान और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम दोनों में संशोधन किया. संविधान संशोधन ने अदालत के समक्ष प्रधानमंत्री के चुनाव को गैर-तर्कसंगत कर दिया. जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के को उन प्रावधानों को सम्मिलित करने के लिए पूर्ववर्ती संशोधन किया गया ताकि श्रीमती गांधी के अवैध चुनाव, कानून में बदलावों से मान्य हो सकें. हिटलर के विपरीत, श्रीमती गांधी भारत को ‘राजवंश लोकतंत्र’ में बदलने के लिए आगे बढ़ीं.’
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इससे पहले रविवार को जेटली ने आपातकाल पर एक लेख लिखा था. इसमें उन्होंने आपातकाल को याद करते हुए कहा कि इंदिरा गांधी की सरकार ने 40 साल से अधिक समय पहले किस तरह एक गलत आपातकाल लागू किया था और लोकतंत्र को एक संवैधानिक तानाशाही में तब्दील कर दिया था.
During Emergency an atmosphere of fear apprehension prevailed in a country. Political activity had come to a harsh halt. The dissenters were especially domestic workers of a antithesis celebration a RSS. They kept regularly organizing Satyagrahas courted arrest.
— Arun Jaitley (@arunjaitley) June 25, 2018
The press was totally terrorized. Most editors reporters surrendered reconciled with a Idea of vital in dictatorship. The Congress Party journal “National Herald” editorially commented that time had come for India to develop into a singular celebration democracy.
— Arun Jaitley (@arunjaitley) June 25, 2018
Mrs. Gandhi’s deception of Emergency underneath Article 352, cessation of elemental rights underneath Article 359 and her explain that “disorder was designed by a antithesis in a country”, echoed Hitler’s “Reichstag” part as unprotected by a Nuremberg trials after 13 years
— Arun Jaitley (@arunjaitley) June 25, 2018
Both Hitler Mrs. Gandhi never abrogated a Constitution. They used a republican Constitution to renovate democracy into dictatorship. Hitler arrested many of a antithesis Members of Parliament converted his minority Government in Parliament into a 2/3rd infancy govt.
— Arun Jaitley (@arunjaitley) June 25, 2018
The afterwards AICC President, Devakanta Barua admitted “Indira is India and India is Indira”. In a minute to Mrs. Gandhi from his apprehension JP wrote “Do not proportion yourself with a nation. India is immortal, we are not”.
— Arun Jaitley (@arunjaitley) June 25, 2018
The Lesson from a Emergency is that if we quell giveaway debate and concede usually propaganda, we turn a initial plant of promotion since we start desiring that your possess promotion is a law and a full truth.
— Arun Jaitley (@arunjaitley) June 25, 2018
जेटली ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा था, “इंदिरा गांधी की घोषित नीति के आधार पर यह एक गलत आपातकाल था, जिसे वह भारत पर थोपना चाहती थीं और उसमें सभी विरोधी आवाजों को कुचलना था.” उन्होंने लिखा था, “संवैधानिक प्रावधानों का इस्तेमाल लोकतंत्र को एक संवैधानिक तानाशाही में तब्दील करने के लिए किया गया.” गौरतलब है कि आंतरिक व्यवधानों का हवाला देकर 25 जून, 1975 को देश में आपातकाल लागू किया गया था, जिसके तहत मौलिक अधिकार निलंबित हो गए थे. (एजेंसी इनपुट के साथ)
Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/politics/politics-over-odd-even-gopal-rai-reaches-vijay-goyal-residence-470890.html
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