Tuesday, 26 June 2018

#ProtectTheGreen: अभी तक कहां सोयी हुई थी केजरीवाल सरकार ?


READ MORE

साउथ दिल्ली के सरोजिनी नगर, कस्तूरबा नगर, नौरोजी नगर, नेताजी नगर, त्याग राज नगर और मोहम्मदपुर में करीब 14000 पेड़ काटे जाने का मामला अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है. आम आदमी पार्टी (आप) ने इसके लिए केंद्र और एलजी को जिम्मेदार बताया है तो उधर बीजेपी का कहना है कि इस प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी दिल्ली सरकार के फॉरेस्ट विभाग को थी और मंजूरी भी वहीं से दी गई थी.सरोजिनी नगर में कई संगठन और आम लोग पेड़ काटे जाने के खिलाफ पहले ही धरने पर है लेकिन आप ने ‘चिपको आंदोलन’ नाम से अलग प्रोटेस्ट की शुरुआत की है. दिल्ली वन विभाग खुद बता रहा है कि बीते छह सालों में 52 हज़ार से ज्यादा पेड़ काटे गए हैं, ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि केंद्र पर निशाना साध रही केजरीवाल सरकार अभी तक कहां सोयी हुई थी.


क्या है दिल्ली की स्थिति
कैग की रिपोर्ट के मुताबिक गंभीर वायु प्रदूषण की मार झेल रही दिल्ली में मौजूदा आबादी की ज़रुरत के हिसाब से 9 लाख पेड़ कम हैं. इसके आलावा किसी शहर के लिए कम से कम 33% फ़ॉरेस्ट कवर ज़रूरी होता है लेकिन दिल्ली में ये घटकर सिर्फ 11% बचा है. भले ही दिल्ली सरकार पेड़ों को लेकर कितनी ही गंभीर क्यों न दिखाई दे रही हो सच ये है कि 2017 की फ़ॉरेस्ट असेसमेंट रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के फ़ॉरेस्ट कवर में तमाम दावों के बाद पिछले 3 सालों में 0.3% की ही वृद्धि हुई है. सरकार काटे जाने वाले पेड़ों की संख्या 14000 बता रही है जबकि प्रोटेस्ट कर रहे लोगों के मुताबिक यह संख्या 16500 के आस-पास है जबकि हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले शख्स के के मिश्रा का दावा है कि सरकार के मास्टर प्लान के मुताबिक आने वाले दिनों में सिर्फ साउथ दिल्ली में 20,000 से ज्यादा पेड़ काटे जाने हैं.


क्या कहती है NBCC की स्टेटस रिपोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट में NBCC ने जो स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है उसके मुताबिक नौरोजी नगर में 1454 पेड़ काटने की अनुमति का नोटिफिकेशन 15 नवंबर 2017 को जारी किया गया था लेकिन अभी यहां 1302 पेड़ ही काटे गए हैं. नेताजी नगर में कुल 2294 हरे पेड़ काटने की अनुमति दी गई थी हालांकि अभी यहां 202 पेड़ काटे गए हैं. जबकि किदवई नगर में पेड़ काटने की अनुमति का नोटिफिकेशन 2014 में ही जारी कर दिया गया था और यहां अभी तक 1123 पेड़ काटे गए हैं.


उधर मोहम्मदपुर में 447 पेड़ काटने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन पर्यावरण और वन विभाग के मंत्री ने काटे जाने वाले पेड़ों की संख्या कम करने की बात लिखकर फाइल लौटा दी थी. हालांकि प्रोटेस्ट कर रहे लोगों का आरोप है कि यहां अवैध तरीके से पेड़ काटे गए हैं. इसके आलावा सरोजनी नगर में 11000 पेड़ काटने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन संख्या काफी ज्यादा होने की वजह से फाइल लौटा दी गई थी. इसके बाद 606 पेड़ काटने का प्रस्ताव दोबारा भेजा गया लेकिन वो भी मंजूर नहीं हुआ. बता दें कि त्यागराज नगर में भी 100 पेड़ काटने के लिए मंजूरी मांगी गई थी लेकिन मिली ही नहीं. गौरतलब है कि कस्तूरबा नगर और श्रीनिवासपुरी जैसे इलाकों में पेड़ काटने के लिए अब तक कोई प्रस्ताव ही नहीं भेजा गया है.


क्या आप राजनीति कर रही है ?
आप की तरफ से सौरभ भारद्वाज और वन मंत्री इमरान हुसैन ने इस मामले में मोर्चा संभाला हुआ है. सौरभ की देख रेख में ‘चिपको आंदोलन’ की शुरुआत की गई है. इमरान हुसैन का कहना है कि 1 हेक्टेयर से ज्यादा पेड़ काटने की अनुमति देने का पावर एलजी के पास है. पेड़ काटने की फाइल पर मैंने आपत्ति जताई है. हुसैन ने कहा कि फारेस्ट विभाग की रिपोर्ट मेरे पास आ गई है, 2600 पेड़ अभी तक काटे गए. हमने आगे आदेश दे दिया है कि आगे कोई भी पेड़ नहीं कटना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि हमने बार-बार फाइल पर लिखा है कि ऐसी जगह प्रोजेक्ट बने जहां पेड़ न कटें. हालांकि इस सवाल पर कि अब तक दिल्ली सरकार क्या कर रही थी वो टालमटोल करते नज़र आते हैं.


 




उधर सौरभ से ये सवाल करने पर वो कहते हैं कि ऐसे फ़ालतू सवालों के लिए उनके पास वक़्त नहीं है. उनके मुताबिक इस मुद्दे पर उनकी पार्टी का एजेंडा क्या है ये ट्विटर पर देखा जा सकता है. सौरभ ने प्रेस कांफ्रेंस कर एनबीसीसी के अध्यक्ष पर भी झूठ बोलने का आरोप लगाया था. उनके मुताबिक एनबीसीसी 11 हजार पेड़ों को और कटवाना चाहती थी, जिस पर दिल्ली सरकार के फॉरेस्ट विभाग ने ऐतराज जताया था, जिसके बाद एनबीसीसी ने कागज विड्रॉ कर लिए और सिर्फ 606 पेड़ काटने की परमिशन मांगी. बाद में छोटे-छोटे समूहों में पेड़ काटने की इजाजत ली गई. सौरभ ने मंगलवार को भी ट्वीट कर आरोप लगाया है कि हाईकोर्ट की रोक के बावजूद NBCC पेड़ काट रही है और दिल्ली पुलिस से इस संबंध में FIR भी दर्ज करने के लिए कहा है.


 




क्या कह रही है बीजेपी
उधर दिल्ली बीजेपी ने भी इस मामले में केजरीवाल सरकार को आड़े हाथों लिया है. दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने खुद को एक किसान परिवार का सदस्य बताते हुए कहा कि उन्हें यह देखकर बहुत दुख हो रहा है कि आम आदमी पार्टी (आप) पेड़ों की कटाई जैसे गंभीर मसले पर भी ओछी राजनीति कर रही है जबकि खुद दिल्ली सरकार ने इसकी इजाजत दी थी. उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी चिपको आंदोलन जैसे बड़े और महत्वपूर्ण आंदोलन के नाम का सहारा लेकर अपनी राजनीति को चमकाने की कोशिश कर रही है. तिवारी ने कहा, ‘मैं खुद मानता हूं कि जब तक बेहद जरूरी न हो, पेड़ नहीं काटे जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि जल्द ही दिल्ली बीजेपी का एक प्रतिनिधि मंडल केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मिलेगा और हम उनसे अनुरोध करेंगे कि यह कोशिश की जाए कि कम से कम पेड़ काटने पड़ें.’



दिल्ली विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि साढ़े तीन वर्ष सत्ता में रहते हुए अरविंद केजरीवाल सरकार दिल्ली में प्रदूषण को रोकने में नाकाम रही है. इसलिए दिल्ली की गिनती देश के सबसे प्रदूषित शहरों में होती है. ऐसे में सौरभ भारद्वाज जैसे नेता पर्यावरण के क्षेत्र में सरकार की असफलता छिपाने के लिए मूल विषय से ध्यान हटा रहे हैं. उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल अनिल बैजल तक पर्यावरण संबंधी कोई भी प्रस्ताव बिना संबंधित मंत्री की स्वीकृति के नहीं पहुंचता है. दिल्ली सरकार के वन विभाग ने वृक्षों को काटने की अनुमति दी थी. जब मामला तूल पकड़ने लगा है तो सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है.

No comments:

Post a Comment