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सुप्रीम कोर्ट ने एक आपराधिक मुकदमे की सुनवाई शुरू होने में एक दशक से ज्यादा की देर पर खेद जताया है. हाईकोर्ट द्वारा दो अलग-अलग लेकिन एक-दूसरे से जुड़े मामलों में एक ही दिन में दो विरोधाभासी आदेश देने के कारण इस मुकदमे की सुनवाई में देरी हुई.शीर्ष न्यायालय ने कहा कि इससे एक कानूनी समस्या पैदा हो गई क्योंकि एक आदेश में मामले की जांच को रोक दिया गया जबकि दूसरे आदेश में उसने जांच जारी रहने की अनुमति दी.
कानूनी पेचीदगियों में फंसा यह मामला वर्ष 2009 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और अपने भाईयों के खिलाफ 2004 में शिकायत दर्ज कराने वाली महिला का अब निधन हो चुका है और उसका कानूनी प्रतिनिधि इस मामले का प्रतिनिधित्व कर रहा है. महिला ने अपनी दुकान हथियाने को लेकर अपने भाईयों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी.
न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने कहा, ‘हमें खेद है कि इस भ्रम से आपराधिक मुकदमा शुरू होने में एक दशक से ज्यादा की देरी हुई.’ पीठ ने महिला की अपीलों पर सुनवाई की अनुमति दी.वर्ष 2004 में उत्तराखंड की रुड़की निवासी श्याम लता ने हरिद्वार के एसएसपी को दी लिखित शिकायत में आरोप लगाया था कि उसके दो भाईयों ने जाली दस्तावेज और हस्ताक्षर बनाए तथा दावा किया कि उसने अपनी दुकान उन्हें किराए पर दी है.
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Article source: http://www.jagran.com/bihar/darbhanga-15865467.html
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