Wednesday, 27 December 2017

बांस अब पेड़ नहीं घास, संसद में पास हुआ बिल


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राज्यसभा ने बांस को घास की श्रेणी में लाने के प्रावधान वाले एक महत्वपूर्ण विधेयक को आज मंजूरी प्रदान कर दी. उच्च सदन ने भारतीय वन संशोधन विधेयक 2017 को चर्चा के बाद ध्वनिमत से मंजूरी दे दी. कांग्रेस सदस्य टी सुब्बारामी रेड्डी ने भारतीय वन संशोधन अध्यादेश 2017 को निरस्त करने की मांग वाले अपने संकल्प को वापस ले लिया. लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है.विधेयक में कटाई और एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिये गैर वन क्षेत्र में उगे हुए बांस को छूट प्रदान करने के लिए कानून में वृक्ष की परिभाषा से ‘बांस’ शब्द हटाए जाने का प्रस्ताव किया गया है. विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन ने कहा कि यह किसानों के हित में है और किसी भी रूप में जन विरोधी नहीं है. देश को इस विधेयक के लिये 90 वर्ष तक इंतजार करना पड़ा और मोदी सरकार ने ऐसी किसान हितैषी पहल की है. इसके माध्यम से 1927 के मूल कानून में संशोधन किये जाने का प्रस्ताव किया गया है.


इसके पहले विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि नवंबर में अध्यादेश लाकर उसने जल्दबाजी की जबकि संसद का शीतकालीन सत्र निकट ही था. इस पर मंत्री ने कहा कि अध्यादेश में ही इस बात का जिक्र था कि सरकार जल्दी ही इस संबंध में एक विधेयक लाएगी. विपक्ष द्वारा विधेयक के प्रावधानों की आलोचना किए जाने पर हर्षवर्द्धन ने कहा कि उन्हें राजनीतिक चश्मे से इसे नहीं देखना चाहिए और यह विधेयक पूरी तरह से गरीबों तथा किसानों के हित में है.


कांग्रेस सहित कई अन्य विपक्षी दलों ने मंत्री के जवाब से असहमति एवं असंतोष जताते हुए सदन से वाक आउट किया. उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक सुधार है और इस पहल के कारण देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. यह काम पहले ही किया जाना चाहिए था लेकिन इसके लिये इतना लम्बा इंतजार करना पड़ा.मंत्री ने कहा कि 1927 के कानून में बांस को वृक्ष की परिभाषा में रखा गया था लेकिन वनस्पति शास्त्र के वर्गीकरण के मुताबिक बांस ‘घास’ की श्रेणी में आता है. ऐसे में यह संशोधन किया गया है. बांस वर्गीकरण की दृष्टि से घास है और इस अधिनियम के प्रयोजन के लिये इसे वृक्ष माना गया है.


विधेयक के अनुसार किसान राज्य के भीतर एवं राज्यों के बाहर भी बांसों की कटाई और उनके परिवहन के लिये परमिट प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं. गैर वन क्षेत्र में उगाए गए बांसों को छूट प्रदान करने के लिये बांस को वृक्ष की परिभाषा के दायरे से बाहर किया गया है. इससे कृषकों को बांस की खेती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी. उन्होंने कहा कि यह प्रावधान केवल गैर-वन्य क्षेत्र या निजी जमीन पर उगे हुए बांस के संबंध में है.


चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा कि वह चार कारणों से विधेयक का विरोध करते हैं. उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल करते हुए अध्यादेश की तात्कालिता स्पष्ट करने की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक गरीबों और पूर्वोत्तर के हित में नहीं है बल्कि निजी उद्योग के हित में है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुरानी व्यवस्था की ओर लौटने और ग्राम सभा के अधिकार में कटौती करने का प्रयास कर रही है. रमेश ने कैंपा विधेयक की चर्चा करते हुए कहा कि सरकार ने आश्वासन दिया था कि संबंधित नियम बनाते समय व्यापक विचार विमर्श किया जाएगा. लेकिन सुझावों पर गौर नहीं किया गया और न ही कोई बैठक की गई.


Article source: http://www.jagran.com/delhi/new-delhi-city-16489089.html

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