Thursday, 26 April 2018

दिल्ली हाईकोर्ट ने कुमार विश्वास पूछा- क्या जेटली से जिरह करना चाहते हैं आप?


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दिल्ली हाईकोर्ट ने आप के असंतुष्ट नेता कुमार विश्वास से जानना चाहा है कि क्या वह डीडीसीए विवाद में उनके खिलाफ केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे में अरूण जेटली से जिरह करना चाहते हैं.न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ ने विश्वास के वकील से कहा कि वह तीन मई को सुनवाई की अगली तारीख पर आप नेता को पेश करें.


समझौते की एक संयुक्त अर्जी कोर्ट में पेश किए जाने के बाद हाईकोर्ट ने तीन अप्रैल को केजरीवाल और आप के चार अन्य नेताओं के खिलाफ मानहानि के दो मुकदमे बंद कर दिए थे. निचली अदालत ने आपराधिक मानहानि के मामले में आप के बागी नेता कुमार विश्वास को छोड़कर मुख्यमंत्री और अन्य को बरी कर दिया था.


गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान जेटली की ओर से उपस्थित अधिवक्ता माणिक डोगरा ने कहा कि विश्वास का मामला अकेला नहीं टिक सकता क्योंकि आप के शेष नेता पहले ही माफी मांग चुके हैं. उन्होंने कहा कि विश्वास केजरीवाल द्वारा अपने बचाव में दी गई दलील का सहारा नहीं ले सकते क्योंकि मुख्यमंत्री पहले ही माफी मांग चुके हैं और उनके और चार अन्य के खिलाफ अब मुकदमा नहीं रहा.न्यायमूर्ति एंडलॉ ने कहा कि जेटली के वकील का कहना है कि केजरीवाल ने सभी आरोप वापस ले लिये हैं और चूंकि विश्वास ने केजरीवाल के लिखित वक्तव्य पर भरोसा किया है, इसलिये कुमार विश्वास के संबंध में आरोप का अस्तित्व नहीं है. विश्वास को तीन मई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने दें.


अदालत ने जेटली के वकील की दलील पर भी गौर किया कि अगर विश्वास उनसे जिरह करना चाहते हैं तो ऐसा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया जा सकता है. हाईकोर्ट ने तीन अप्रैल को जेटली, केजरीवाल और आप के चार नेताओं – राघव चड्ढा, संजय सिंह, आशुतोष और दीपक बाजपेयी के 10 करोड़ रुपये की मानहानि के मुकदमे में संयुक्त समझौते की अर्जी मंजूर कर ली थी. यह केस जेटली ने केजरीवाल और आप के पांच अन्य नेताओं के खिलाफ दायर किया था.


अदालत ने हालांकि कहा था कि विश्वास के खिलाफ मानहानि का मुकदमा जारी रहेगा क्योंकि उन्होंने मामले में समझौता करने की पेशकश नहीं की.


बता दें कि जेटली ने दिसंबर 2015 में केजरीवाल और आप के पांच अन्य नेताओं के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। इन नेताओं ने जेटली के दिल्ली एवं जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) का अध्यक्ष रहने के दौरान उसमें वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए थे. भाजपा नेता ने सभी आरोपों का खंडन किया था.


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