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कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने सरकार के फेक न्यूज़ मामले में आए फैसले पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि पत्रकारों को खुलकर न्यूज़ रिपोर्टिंग करने से रोकने की मंशा से ये कदम उठाया गया है. उन्होंने ये भी कहा कि आखिर ये कैसे पता चलेगा कि कोई खबर फेक है या सही और इसका इस्तेमाल पत्रकारों के शोषण में भी किया जा सकता है.केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अहमद पटेल के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि गैर-सरकारी संस्थाएं प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और न्यूज़ ब्रॉडकास्टर एसोसिएशन ही खबरों की पड़ताल करके ये फैसला लेगें कि न्यूज़ फेक है या नहीं.
फेक न्यूज़ को रोकने की कोशिश से सहमति जताते हुए अहमद पटेल ने अपने ट्वीट में फेक न्यूज को लेकर चार सवाल पूछे-
- इसकी क्या गारंटी है कि इन नियमों से ईमानदार पत्रकारों का शोषण नहीं किया जाएगा?2. फेक न्यूज में क्या-क्या हो सकता है इसका फैसला कौन करेगा?
3. क्या ये संभव है कि शिकायत के आधार पर जब तक जांच जारी है तब तक मान्यता रद्द न की जाए?
4. इसकी क्या गारंटी है कि बनाई गई गाइडलाइन्स का इस्तेमाल सिर्फ फेक न्यूज चेक के लिए किया जाएगा, बल्कि पत्रकारों को सहज रिपोर्टिंग से रोकने के लिए नहीं?
स्मृति ईरानी ने अहमद पटेल के सवालों का जवाब देते हुए ट्वीट किया, “आपको जागा हुआ देखकर खुशी हुई अहमद पटेल जी. न्यूज आर्टिकल या ब्रॉडकास्ट की गई न्यूज फेक है या नही इसका फैसला पीसीआई और एनबीए करेगे और आपको पता होगा कि दोनों ही गैर-सरकारी संस्थाएं है.”
Glad to see you awake @ahmedpatel ji whether a News article / broadcast is fake or not will be determined by PCI NBA; both of whom I’m sure you know are not controlled/ operated by GOI.
— Smriti Z Irani (@smritiirani) April 2, 2018
आपको बता दे कि मंगलवार को सरकार ने पत्रकारों की मान्यता से संबंधित नए बदलाव किए हैं. फर्जी खबर चलाने वाले पत्रकारों की मान्यता रद्द करने के प्रावधान इसमें किए गए हैं. केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने विज्ञप्ति जारी की है कि फेक न्यूज लिखने वाले पत्रकारों की मान्यता हमेशा के लिए खत्म कर दी जाएगी.
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पहली बार फेक न्यूज साबित होने पर 6 महीने के लिए पत्रकार की मान्यता निलंबित की जाएगी, दूसरी बार साल भर के लिए और तीसरी बार ऐसी शिकायत मिलने पर हमेशा के लिए मान्यता रद्द की जा सकती है.
फेक न्यूज की जांच प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स असोसिएशन द्वारा की जाएगी. प्रिंट मीडिया से संबंधित मामलों की जांच पीसीआई और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की जांच एनबीए करेगी. सरकार का मानना है कि इस कदम से फेक न्यूज का नियमन किया जा सकेगा.
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