Thursday, 26 April 2018

बोफोर्स डील में कांग्रेस सरकार को क्यों थी इतनी जल्दी? PAC ने रिपोर्ट में उठाए सवाल


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लोक लेखा समिति (पीएसी) ने रक्षा मंत्रालय से कहा है कि उसने बोफोर्स विवाद पर अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया है. समिति ने अपनी रिपोर्ट में बोफोर्स तोपों की खरीद में आखिर सरकार को इतनी जल्दी क्यों थी? संसद के अगले सत्र में ये रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाएगी.सूत्रों के मुताबिक, समिति ने माना है कि इससे जुडे तमाम रिकॉर्ड और दस्तावेजों को संभाल कर रखने में कोताही बरती गई. दस्तावेज मंगवाने पर बार-बार यही बहाना दिया कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है.


समिति ने पाया कि पूरे सिस्टम ने ढिलाई बरती और राजनीतिक ड्रामेबाजी ही चलती रही. समिति ने कहा है कि मंत्रालय एक ऐसा सिस्टम बनाएं, जिसके तहत ऑडिट को लेकर आपत्तियां होने पर एक तय समय सीमा में जांच का प्रावधान हो.


पीएसी ने इस बात पर दुख भी जताया है कि पूरे घटनाक्रम में जांच से जुडी संस्थाओं और लोगों ने समझौते किए. समिति ने कहा है कि जांच से जुड़ी ऐसी तमाम संस्थाओं को राजनीति से बाहर निकल कर अपनी जिम्मेदारी बेहतर तरीके से संभालनी चाहिए.समिति ने पाया कि सरकार के तमाम अंगों के बीच तालमेल की कमी थी. जांच एजेंसियों द्वारा सबूत नहीं जुटाने पर भी गहरी चिंता जताई गई. समिति के मुताबिक, एक्शन टेकेन नोट्स भेजने में भी मंत्रालयों ने बहुत देरी की. इसलिए समिति ने सिफारिश की है कि केबिनेट सचिवालय एक ऐसा सिस्टम बनाए, जिसके तहत जांच कर रहे मंत्रालय के तमाम शीर्ष अधिकारियों को देरी के जिम्मेदार ठहराया जा सके और कैबिनेट सेक्रेटरी हर 6 महीने में बैठक कर के विभाग के सचिवों की काम की जांच कर सके.


समिति ने सिफारिश की है कि सीवीसी अपनी रिपोर्ट पीएसी के सामने पेश करे, जिसके साथ जो कार्रवाई हुई, उसकी रिपोर्ट भी हो और उसके साथ देरी हुई, तो क्यों ये भी रिपोर्ट हो.


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