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एससी-एसटी एक्ट में हुए बदलाव को लेकर केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच सोमवार को केंद्रीय कानून मंत्रालय की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर किया गया.एनडीए के दलित सांसद और लोजपा प्रमुख राम विलास पासवान और केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने की अपील की थी. जिसके बाद कानून मंत्रालय ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा भेजी गई अर्जी को मंजूरी दे दी थी.
इससे पहले राहुल गांधी ने एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ कदम उठाने की मांग को लेकर बीते बुधवार को राष्ट्रपति से मुलाकात की थी. राहुल गांधी ने कहा था कि दलितों और आदिवासियों के खिलाफ देश भर में अत्याचार के मामले बढ़े हैं, जबकि एससी/एसटी एक्ट कमजोर हुआ है.
दरअसल, 21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एससी/एसटी एक्ट 1989) के तहत दर्ज मामलों में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत के बाद ही हो सकती है. जो लोग सरकारी कर्मचारी नहीं है, उनकी गिरफ्तारी एसएसपी की इजाजत से हो सकेगी. हालांकि, कोर्ट ने यह साफ किया गया है कि गिरफ्तारी की इजाजत लेने के लिए उसकी वजहों को रिकॉर्ड पर रखना होगा.
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