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14 साल की सोनल अपनी उम्र से बड़ी इसलिए दिखने लगी थी क्योंकि मां के गुज़रने के बाद घर की पूरी ज़िम्मेदारी उस पर ही थी. गरीबी से मजबूर उसके पिता को जब बड़ी रकम का लालच दिया गया तो वह सोनल की शादी उससे उम्र में तीन गुना बड़े आदमी से करने के लिए राज़ी हो गए. शादी क्या यह एक लड़की को खरीदने-बेचने का मामला था.READ: पूरी रकम नहीं मिली तो मां-बाप ने की बेटी की दूसरी डील
सोनल की मां कुछ ही वक्त पहले गुज़र चुकी थी और वह अपने पिता के साथ ही रहा करती थी. 14 साल की सोनल के पिता और चाचा मज़ूदरी करके घर चलाते थे इसलिए परिवार में अक्सर तंगी के हालात रहते थे. सोनल की पढ़ाई लिखाई का ख़याल तो दूर की बात थी, उससे उम्मीद रहती थी कि वह काम में किसी तरह हाथ बंटाए और परिवार में मदद करे. सोनल अपनी क्षमता के हिसाब से काम करती भी थी और घर में रसोई, साफ सफाई का तो सारा काम उसी ने इस कम उम्र में संभाल रखा था.
पूरे घर की ज़िम्मेदारी अपने सर लेने वाली सोनल अपनी उम्र से बड़ी और ज़्यादा गंभीर नज़र आने लगी थी. घर पर एक आदमी का आना-जाना था जिसका नाम था मोहन. मोहन एक तरह का दलाल था जो शादियां करवाया करता था. एक दिन मोहन को सोनल को देखा और उसके रिश्ते की बात उसके पिता से छेड़ी. उसके पिता ने उस वक्त मना कर दिया क्योंकि न तो उनके पास देने के लिए कुछ दहेज जमा था और न ही सोनल की उम्र शादी लायक थी.मोहन तब तो वहां से चला गया लेकिन कुछ ही दिनों बाद फिर सोनल के पिता से मिला और इस बार उसने एक लालच दिया. मोहन ने कहा कि दहेज देना नहीं पड़ेगा बल्कि लड़के वाले शादी के लिए उल्टा उसे अच्छी रकम देंगे. गुजरात के बनासकांठा ज़िले के दंतीवाड़ा में रहने वाले सोनल के पिता को यह सुनकर हैरानी हुई और जब मोहन ने यह रकम एक लाख रुपये तक होने की बात कही तो वह लालच में आ ही गया.

दो साल बाद शादी हो या पहले, क्या फर्क पड़ता है. सोनल के पिता का नज़रिया बदल गया और उसे लगने लगा कि वह शादी लायक तो है ही. मोहन रिश्ते की बात पक्की करने के बाद जल्द ही खुशखबरी लाने का वादा करके चला गया. सोनल के पिता ने सोनल को समझाया और अपनी गरीबी और लाचारी का वास्ता देकर उसकी शादी पक्की कर देने की बात कही. सोनल ने अपने घर की मजबूरियां समझते हुए हामी भर दी.
मोहन ने अहमदाबाद में एक परिवार से सोनल के पिता के सहमत होने की बात बताई और अपना कमीशन तय किया. इस परिवार में एक 42 साल का आदमी था निखिल. निखिल की मानसिक हालत ठीक नहीं थी इसलिए उसकी शादी नहीं हो पा रही थी. इसी दिक्कत के कारण उसके परिवार ने गरीब घर की सोनल का हाथ मांगा था जिसके लिए एक लाख रुपये देने को भी वो राज़ी थे. मोहन के ज़रिये दोनों परिवारों की मुलाकात हुई और तय रकम सोनल के पिता को दे दी गई. शादी की तारीख तय हो गई.
सोनल को उसके पिता और कुछ करीबी रिश्तेदार अहमदाबाद लेकर आए. निखिल के घर में उत्सव जैसा माहौल था और मोहल्ले के लोग जमा होकर गरबा खेल रहे थे. शादी की तैयारियां चल रही थीं और पूरा परिवार खुश नज़र आ रहा था. तभी एकाएक उस घर में पुलिस पहुंची और इस शादी को गैर कानूनी करार देकर दोनों परिवारों के मुखियाओं को साबरमती थाने लेकर गई. अचानक इस कार्यवाही से घबरा चुके सोनल और निखिल के पैरेंट्स ने पहले तो शादी होने की बात से इनकार किया लेकिन थोड़ी ही देर में निखिल के पिता ने सच स्वीकार कर लिया.
अस्ल में, निखिल के किसी पड़ोसी ने एक बच्ची की शादी होने की खबर हेल्पलाइन अभयम के ज़रिये दी थी. इसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने ले जाकर पूछताछ की तो सच सामने आ गया. निखिल के पिता ने इस शादी के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये तक दिया जाना स्वीकार किया. बाल विवाह निरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया हालांकि इस मामले में पीड़ितों व आरोपियों के नामों का खुलासा नहीं किया गया. एक आंकड़ा यह सामने आया है कि इस हेल्पलाइन के ज़रिये गुजरात में इसी साल 100 मामलों में बाल विवाह होने से रोका गया.
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