Monday, 25 June 2018

शैलजा की इस एक गलती से गई जान, मेजर ने ऐसे बनाया था प्लान


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धागे भर का फर्क होता है जुनून और सनक में. धागे के इधर जुनून और धागे के उधर सनक. और जहां ये धागा टूट जाए, अक्सर वहां बन जाती है जुर्म की एक कहानी. यही हुआ बीते शनिवार को दिल्ली में, जब एक मेजर ने एक महिला का कत्ल कर दिया. प्यार और जुनून तो बस खूबसूरत बहाने थे, असल में कत्ल की वजह थी सनक, जिसे कोई और नाम देना मुनासिब नहीं है.तीन साल पहले 2015 में निखिल और शैलजा की पहली मुलाकात हुई थी. नगालैंड के दीमापुर में शैलजा के पति और आर्मी अफसर अमित की पोस्टिंग थी और वहीं आर्मी अफसर निखिल भी पोस्टेड था. निखिल और शैलजा पहली ही मुलाकात के बाद एक-दूसरे से प्रभावित थे और दोनों ही शादीशुदा होने के बावजूद एक-दूसरे के साथ दोस्ती की राह पर आगे बढ़ चले.


ये मुलाकातें बढ़ीं और निखिल और शैलजा के बीच दोस्ती होती चली गई. फिर अमित का तबादला हो गया और शैलजा दिल्ली शिफ्ट हो गई. इस तब्दीली के बाद निखिल का ट्रांसफर मेरठ हो गया. तब निखिल को इस बात का एहसास होने को था कि दिल्ली और मेरठ के बीच उतनी ही दूरी थी जितनी निखिल और शैलजा की दोस्ती और शादी हो पाने में.


शैलजा के प्यार में निखिल इस कदर डूब चुका था कि वह उससे शादी कर लेने के लिए बेकरार था. इधर, शैलजा ने साफ कर दिया था कि वह सिर्फ दोस्ती रख सकती है, शादी नहीं कर सकती. निखिल लगातार कोशिशें कर रहा था शैलजा को मनाने की लेकिन हर बार शैलजा का जवाब यही था. इस बारे में दोनों के बीच फोन पर, सोशल मीडिया और वीडियो कॉल पर बातचीत होती रहती थी.


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शैलजा द्विवेदी.

कुछ वक्त से अमित को शक था कि शैलजा और निखिल के बीच कुछ खिचड़ी पक रही है. अमित ने दोनों को एक दिन वीडियो कॉल पर रंगे हाथ पकड़ लिया. शैलजा और अमित का इस बात को लेकर झगड़ा हुआ और उसने निखिल के साथ किसी तरह का संपर्क न रखने की हिदायत दी. अमित को निखिल कतई पसंद नहीं था और अमित ने निखिल को शैलजा व उसके परिवार से दूर रहने की हिदायत भी दी.


दूसरी तरफ, एक बच्चे का पिता निखिल यह मानने के लिए कतई राज़ी नहीं था कि वह शैलजा को भूल जाए. वह चोरी छिपे और मौका देखकर शैलजा को फोन करता शैलजा कभी उसका फोन रिसीव करती तो कभी नहीं. इस बीच, शैलजा के पैर में चोट लगी और वह डिफेंस के बेस अस्पताल में फिज़ियोथैरेपी के सेशन्स के लिए जाने लगी. यह खबर निखिल को मिली तो उसे मुलाकात करने का एक अच्छा मौका नज़र आया.


आर्मी अफसरों के परिवारों के इलाज के लिए दिल्ली स्थित इस बेस अस्पताल में निखिल ने अपने बेटे को भी इलाज के लिए दाखिल करवाया और खुद भी एक मरीज़ के तौर पर वहां पहुंचा. इस अस्पताल में आने का उसका केवल यही मकसद था कि वह शैलजा से मुलाकात कर सके. एक-दो कोशिशें नाकाम होने के बाद 23 जून शनिवार को सुबह दस बजे से दोपहर एक बजे के बीच निखिल ने शैलजा को कई फोन किए.


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मेजर निखिल हांडा.

आखिरकार, शैलजा ने परेशान होकर निखिल से मुलाकात करने के लिए हामी भर दी. शैलजा अपने घर से फिज़ियोथैरेपी सेशन के लिए अमित की सरकारी गाड़ी से अस्पताल पहुंची. तय समय के बाद वही सरकारी कार शैलजा को लेने अस्पताल पहुंची तो अस्पताल से ड्राइवर को पता चला कि शैलजा वहां सेशन के लिए आई ही नहीं. ड्राइवर ने यह सूचना अमित को दी.


एक महिला की लाश सड़क किनारे बरामद हो चुकी थी और पुलिस लाश की शिनाख़्त करने में जुटी थी. इसी बीच, देर शाम तक शैलजा का इंतज़ार करने और उससे कोई संपर्क न हो पाने के बाद गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाने अमित पुलिस के पास पहुंचा. जिस लाश की शिनाख्त में पुलिस जुटी थी, उसकी शिनाख्त जब अमित से करवाई गई तो पता चल गया कि यह शैलजा की लाश थी.


निखिल भी ठान चुका था कि आज कोई न कोई फैसला करके ही रहेगा, इसलिए वह कार में पहले से चाकू रखकर लाया था. निखिल सोच चुका था अगर शैलजा उसकी नहीं हो सकती तो उसके होने का फायदा ही नहीं है. तैश में निखिल ने कार में ही शैलजा को पकड़कर उसका मुंह बंद कर दिया. छटपटा रही और छूटने की कोशिश कर रही शैलजा बुरी तरह डर चुकी थी और अगले ही पल निखिल ने धारदार चाकू निकालकर शैलजा का गला काट दिया.


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शैलजा द्विवेदी और हत्या का आरोपी मेजर निखिल हांडा.

कुछ पल तड़पने के बाद शैलजा ने दम तोड़ दिया. अब निखिल को समझ नहीं आया कि वह लाश का क्या करे. उसने कार चलाई और एक वीरान जगह देखकर सड़क किनारे शैलजा की लाश फेंक दी. इसके बाद निखिल को लगा कि इस मौत को एक्सीडेंट का रंग दिया जाए. उसने लाश को कार तले कई बार कुचला और फिर वहां से अस्पताल पहुंचकर बेटे की सेहत का जायज़ा लिया.


कुछ ही देर में ज़रूरी सामान साथ रखकर निखिल ने कार को साफ किया. एक बार फिर छावनी के अस्पताल पहुंचा और उसके आसपास धीमी रफ्तार से कार चलाते हुए वहां का माहौल समझने की कोशिश की. थोड़ी ही देर बाद निखिल अपनी कार से मेरठ के लिए रवाना हो गया. मेरठ में ही निखिल की पोस्टिंग थी, इसलिए उसने सोचा कि मामला ठंडा होने तक वह मेरठ में ही सुरक्षित रहेगा. निखिल के मेरठ पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने दबिश दी और निखिल को गिरफ्तार कर दिल्ली ले आई.


असल में, पुलिस ने अस्पताल परिसर के सीसीटीवी फुटेज से निखिल की कार की डिटेल्स निकालीं, जिसमें शैलजा आखिरी बार दिखाई दी थी. शैलजा के पति अमित ने निखिल पर शक ज़ाहिर किया था और इधर, शैलजा के फोन से मिले डिटेल्स में भी निखिल के नंबर पर बातचीत होना पाया गया. निखिल की तलाश में पुलिस को पता चला कि वह बार-बार लोकेशन बदल रहा है. इस बीच, मेरठ के टोल नाके के सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि उसकी कार गुज़री है. लोकेशन ट्रेस करते हुए पुलिस ने निखिल को पकड़ ही लिया.


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Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/city-khabrain/madarsa-child-rescued-by-police-on-ibnsevens-information-522246.html

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