Friday, 1 June 2018

'सब्‍जी या दूध के बिना कोई मरेगा नहीं लेकिन किसान ने खेती बंद कर दी तो क्‍या होगा'


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राष्‍ट्रीय मजदूर किसान संघ के अध्‍यक्ष शिवकुमार शर्मा ‘कक्‍काजी’ ने लोगों से किसानों की हालत को लेकर गंभीरता से सोचने को कहा. उन्‍होंने शुक्रवार से शुरू हुई किसानों की 10 दिन की हड़ताल पर माफी मांगते हुए लोगों से कहा कि सोचिए यदि किसान फसल उगाना बंद कर देगा तो क्‍या होगा. बता दें कि किसानों ने एक से 10 जून तक गांवों से शहरों में दूध और सब्जियों की आपूर्ति बंद करने का फैसला किया है. इस हड़ताल में मध्‍य प्रदेश, महाराष्‍ट्र,पंजाब, राजस्‍थान, उत्‍तर प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा और छत्‍तीसगढ़ के किसान शामिल हैं.पत्रकारों से बातचीत में कक्‍काजी ने कहा कि 46 हजार किसानों की मौत जनता की परेशानी से ज्‍यादा गंभीर मसला है. उन्‍होंने कहा, ‘दूध या सब्जियों के बिना किसी की मौत नहीं होगी लेकिन मामले की गंभीरता को समझिए यदि हमने फसलें उगाना शुरू कर दिया तो क्‍या होगा. इससे पहले किसानों के 110 संगठन हमारे प्रदर्शन को समर्थन दे रहे थे लेकिन अब बीजेपी के सहयोगी एक-दो संगठनों को छोड़कर बाकी सब हमारे साथ हैं.’


यह प्रदर्शन मध्‍य प्रदेश के मंदसौर में पिछले साल हुए किसानों के आंदोलन की पहली बरसी पर हो रहा था. इस आंदोलन में छह मई 2017 को पुलिस गोलीबारी में छह किसानों की जान गई थी. 2017 में हुए किसान आंदोलन का नेतृत्‍व भी कक्‍काजी ने ही किया था.उन्‍होंने कहा कि एमएसपी की कमी, खराब मौसम, मंडियों में बिचौलिए, कीमतों में कमी और बीमा में गड़बडी से मध्‍य प्रदेश के किसान परेशान हैं. इस साल फरवरी में सरकारी एजेंसियों को चना खरीदना था लेकिन इसकी खरीद मई में जाकर हुई. उन्‍होंने आरोप लगाया कि कड़ी धूप में फसल बेचने के इंतजार में पांच किसानों की मंडी में मौत हो गई. बकौल कक्‍काजी, ‘इस बार हम गांव बंद प्रदर्शन पर डटे हुए हैं और इस दौरान कुछ भी अप्रिय होता है तो इसके जिम्‍मेदार मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान होंगे.’


शिवराज के कार्यकाल पर तीखा हमला बोलते हुए उन्‍होंने कहा कि बीजेपी के 15 साल के शासन में किसानों का एक लाख रुपये का लोन 15 लाख रुपये तक पहुंच गया.


हम उत्‍पादन पर डेढ़ गुना कीमत, एक बार में कर्ज माफी, छोटे किसानों को तय कमाई और प्‍याज, आलू, लहसुन, दूध और सब्जियों को समर्थन मूल्‍य के दायरे में लाने की मांग करते हैं.


उन्‍होंने कहा कि किसी भी राजनेता को प्रदर्शन का श्रेय नहीं लेने दिया जाएगा लेकिन राजनीतिक दल इसका समर्थन करने को आजाद हैं. यदि मांगें नहीं मानी गई तो 11 जून की बैठक में राष्‍ट्रीय मजदूर किसान संघ भविष्‍य की योजना पर फैसला लेगा.


किसानों के प्रदर्शन के पहले दिन नीमच और मंदसौर में हालात सामान्‍य रहे. यहां पर दूध, सब्‍जी और फलों की सप्‍लाई आंशिक रूप से प्रभावित हुई. पुलिस ने कस्बों और हाइवे पर कड़ी निगरानी रखी. यह दोनों शहर पिछले साल हुए किसान आंदोन के केंद्र में थे. देवास में दूध सप्‍लाई पर असर पड़ा लेकिन दूध प्‍लांटों ने कमी की भरपाई कर दी और पुलिस सुरक्षा में दूध के टैंकर गांवों में भेजे गए. मालवा-निमाड़ इलाके में सब्जियों के दामों में कमी आई, यहां पर पिछले कुछ दिनों में सब्‍जी के दाम बढ़ गए थे.

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