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सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए युवा आतंकी रऊफ खांडाय को उसके माता- पिता और सुरक्षाकर्मियों ने समर्पण के लिए घंटों समझाया, लेकिन वह नहीं माना और अंत में मारा गया.रऊफ को हिज्बुल मुजाहिदीन का आतंकवादी माना जा रहा है जो रविवार को दक्षिण कश्मीर में अनंतनाग जिले के दिआलगाम में भोर से पहले के अंधेरे में मारा गया. मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि रऊफ को समर्पण करने के लिए घंटों समझाया गया, लेकिन वह नहीं माना.
हाल ही में स्नातक प्रथम वर्ष उत्तीर्ण करने वाला रऊफ गांव के एक घर में घेरे गए दो आतंकवादियों में शामिल था. एक अधिकारी ने बताया कि उसके अंत की शुरुआत रात लगभग 11 बजे हुई जब पुलिस के वायरलेस बज उठे. वायरलेस पर सूचना मिली कि दो आतंकवादी एक घर में छिपे हैं. आतंकवादियों की पहचान सुनिश्चित करने के बाद सुरक्षाबलों ने घर की घेराबंदी कर दी और उनसे समर्पण करने को कहा.
एक आतंकवादी, जिसकी पहचान उजागर नहीं की गई है, उसने तत्काल समर्पण कर दिया और वह रऊफ को अंदर छोड़कर बाहर आ गया. अधिकारियों ने बताया कि रऊफ से भी समर्पण के लिए कहा गया. उस तक एक फोन पहुंचाया गया जिससे कि बातचीत शुरू की जा सके. इसके बाद घंटों तक उससे बातचीत की कोशिश की गई, यहां तक कि वहां उसके माता- पिता को भी लाया गया जिससे कि वे उसे समझा सकें.अनंतनाग के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अल्ताफ अहमद खान ने कहा, ‘‘ मुझे विश्वास था कि माता- पिता उसे समझाने में सफल होंगे और वह बाहर आकर समर्पण कर देगा. लेकिन होनी को कुछ और मंजूर था.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने वह हर चीज की जिससे कि वह समर्पण कर सके. लेकिन युवा लड़के ने मेरी हर कोशिश को नाकाम कर दिया जिसके मन में जहर भरा गया था.’’
खान ने कहा, ‘‘मैंने उसे पवित्र कुरान की आयतों के बारे में बताया और उससे कहा कि वह जो कुछ कर रहा है, वह इस्लाम के खिलाफ है. बातचीत 30 मिनट से अधिक समय तक चली. इस दौरान वह गुस्सा हो उठा और गाली- गलौज करने लगा. लेकिन मैंने इसे नजरअंदाज किया क्योंकि मैं उसे मारे जाने से बचाना चाहता था.’’
एक अधिकारी ने बताया कि बाहर मौजूद कमांडरों ने सारी बात सुनते हुए उस मकान पर अपनी नजरें टिकाए रखीं जहां रऊफ छिपा हुआ था. रविवार की रात लगभग एक बजे रऊफ ने कहा कि वह अपनी मां से बात करना चाहता है. इसकी उसे मंजूरी दे दी गई.
खान ने कहा, ‘‘ मैंने वहां से सात किलोमीटर दूर उसके पैतृक आवास पर एक पुलिस टीम भेजी. सुरक्षाकर्मी उसके पिता बाशिद अहमद खांडाय और मां को लेकर आए जिससे कि वे उसे समर्पण के लिए राजी कर सकें.’’
उन्होंने कहा, ‘‘ हम उसकी जान इस हद तक बचाना चाहते थे कि हम सभी उसकी मां के इस आग्रह पर सहमत हो गए कि यदि वह समर्पण कर देता है तो वह उसे घर ले जाएगी.’’ माता- पिता अपने बेटे से बात करने घर के अंदर चले गए, जिससे उम्मीद बढ़ गई कि कोई खून- खराबा नहीं होगा. आधे घंटे बाद वे बाहर आ गए. उनके चेहरे पर निराशा थी.
खान ने कहा, ‘‘दिल की धड़कन बढ़ गई. मैं सिहर उठा क्योंकि अब हमें अपना अंतिम काम करना था.’’ घटनास्थल पर मौजूद एक कमांडर ने उसके माता- पिता से माफी मांगी जो अपने बेटे की होनी के बारे में जानते थे.
खान ने कहा, ‘‘ मैंने माता- पिता को अपने यहां भेज दिया क्योंकि वे घबराए हुए थे, खासकर मां… .’’
अब तड़के तीन बज चुका था. खान ने रऊफ की जान बचाने की एक और कोशिश की. उन्होंने एक छोटी टीम से कहा कि वह देखे कि क्या कहीं से पीछे से घुसा जा सकता है जिससे कि उस पर काबू पाया जा सके.
खान ने कहा कि रऊफ ने उन पर तब गोली चला दी जब उन्होंने कहा कि वह बिना हथियार के घुस रहे हैं और उससे केवल बात करेंगे. इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने अंतिम कार्रवाई शुरू कर दी और रऊफ मारा गया.
उन्होंने रुंधे गले से कहा, ‘‘ मैंने पूरे प्रयास किए, लेकिन सब विफल रहे.’’ पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने संवाददाता सम्मेलन के दौरान रऊफ की जान बचाने की खान की कोशिशों के बारे में विशेष उल्लेख किया. घाटी में कल तीन जगहों पर हुई मुठभेड़ों में 13 आतंकवादी और चार आम लोग मारे गए. इस दौरान सेना के तीन जवान शहीद हो गए.
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Article source: http://www.rediff.com/business/slide-show/slide-show-1-cricket-buff-technocrat-nadella-wears-many-a-hat/20140205.htm
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