READ MORE
भारत ने चीन पर दबाव बनाने के लिए सीमा पर सैनिकों की संख्या बढ़ाने के साथ ही मिसाइल और तोपों को भी तैनात कर दिया है. चीनी घुसपैठ को रोकने के लिए भारत ने ये रणनीति बनाई है. बताया जा रहा है कि भारत ने पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में T-72 टैंकों की तैनाती की है.अरूणाचल की सीमा पर ब्रह्मोस मिसाइल और हॉवित्ज़र तोप तैनात की हैं. इसके अलावा पूर्वोत्तर में सुखोई-30 MKI स्क्वेड्रन्स को भी उतारा गया है. अकेले अरूणाचल की रक्षा के लिए 48 हज़ार सैनिकों को रखा गया है इसके अलावा सैनिकों के दो डिविज़न रिजर्व रखे गए हैं.
भारत की ये रणनीति अपनाने की मुख्य वजह चीनी घुसपैठ है क्योंकि 2017 में चीन लिबरेशन आर्मी ने भारतीय सीमा में 426 बार घुसपैठ की थी.
चीन सीमा पर भारत की ताक़त– पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में T-72 टैंकों की तैनाती
– अरुणाचल की सीमा पर ‘ब्रह्मोस’ और ‘हॉवित्ज़र’ तैनात
– पूर्वोत्तर में सुखोई-30 MKI स्क्वेड्रन्स को उतारा
– अरूणाचल की रक्षा के लिए 48 हज़ार सैनिक
– सैनिकों के दो डिविज़न रिज़र्व रखे
– चीनी घुसपैठ की वजह से सीमा पर ताक़त बढ़ाई
– 2017 में चीनी सेना ने 426 बार घुसपैठ की
अरुणाचल में उतारे ब्रह्मोस और होवित्जर मिसाइल
भारत ने पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में टी-72 टैंकों की तैनाती की है, जबकि अरुणाचल में ब्रह्मोस मिसाइलों और होवित्जर तोपों की तैनाती कर चीन के सामने शक्ति प्रदर्शन किया है। इसके अलावा पूर्वोत्तर में सुखोई-30 एमकेआई स्क्वेड्रन्स को भी उतारा गया है। बीते साल सर्दियों में चीनी सैनिकों के उत्तरी डोकलाम डेरा जमाने की घटना के बाद से भारतीय सेना ने यह बड़ा बदलाव और तैनाती की है.
भारत ने पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में टी-72 टैंकों की तैनाती की है, जबकि अरुणाचल में ब्रह्मोस और होवित्जर मिसाइलों की तैनाती है. 2017 में चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने 426 बार भारतीय सीमा में घुसपैठ की थी.
डोकलाम में चीन और भारतीय सैनिकों के बीच दो महीने से ज्यादा वक्त तक चले गतिरोध के बाद बढ़ी सैनिकों की तैनाती
अकेले अरुणाचल की रक्षा के लिए 4 इन्फ्रेंट्री माउंटेड डिविजन्स को तैनात किया गया है. हर इन्फेंट्री में 12,000 सैनिकों को रखा गया है. इसके अलावा 2 डिविजंस को रिजर्व रखा गया है.
खासतौर पर तवांग में, जिसे चीन दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है, सैनिकों की तैनाती पहले से कहीं अधिक है. किबिथू-वालॉन्ग फ्रंटियर में तैनात एक सीनियर अफसर ने कहा, ‘हमारा प्राथमिक काम एलएसी पर शांति और स्थिरता बनाए रखना है और शांति के दौर में पर्वतीय चोटियों पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना है.
2017 में चीन ने 426 बार की घुसपैठ
विस्तारवादी और आक्रामक चीन अकसर सीमा पर घुसपैठ कर जोर-आजमाइश करता रहता है. बीते साल की बात करें तो चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने 426 बार घुसपैठ की थी। इनमें से करीब आधी बार दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ गए थे। 2016 में यह आंकड़ा 273 का था, लेकिन बीते सालों में चीन की आक्रामकता लगातार बढ़ती जा रही है.
Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/manoranjan/salman-case-414534.html
No comments:
Post a Comment