Thursday, 26 April 2018

'अपने लोगों को ज्यूडिशियरी में फिट करना चाहती है केंद्र': इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति पर बोली कांग्रेस


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उत्तराखंड के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ को दरकिनार कर सीनियर वकील इंदु मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज नियुक्त करने का केंद्र सरकार का फैसला विवादों में आ गया है. सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम सिस्टम में जस्टिस जोसेफ के नाम पर दोबारा विचार को लेकर कांग्रेस ने केंद्र पर हमला बोला है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए कांग्रेस के सीनियर नेता कपिल सिब्बल ने कहा, “हिंदुस्तान की न्यायिक व्यवस्था खतरे में है. सरकार अपने लोगों को ज्यूडिशियरी सिस्टम में लाना चाह रही है.”कपिल सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है कि केएम जोसेफ सबसे काबिल जज हैं. फिर भी केंद्र सरकार ने कॉलेजियम की ओर से भेजे गए नामों में शामिल जस्टिस जोसेफ के नाम पर विचार नहीं किया और इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति कर दी गई. बता दें कि कॉलिजियम ने वरीयता क्रम में जस्टिस जोसेफ को पहले और मल्होत्रा को दूसरे नंबर रखा था.


सिब्बल ने बताया इसलिए अप्वॉइंट नहीं हुए जस्टिस जोसेफकपिल सिब्बल का कहना है कि जस्टिस जोसेफ ने ही उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के एनडीए सरकार के फैसले को पलट दिया था. उन्होंने कहा कि जस्टिस केएम जोसेफ सबसे काबिल जजों में शुमार होते हैं, लेकिन केंद्र सरकार उनकी नियुक्ति में अड़ंगा लगा रही है. क्योंकि केंद्र को लगता है कि वह काबिल ही नहीं हैं.


जज लोया केस में फिक्स थी सभी पीआईएल
वहीं, जज लोया के मामले पर बात करते हुए सिब्बल ने कहा, “हमें दुख है कि इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई.” बता दें कि सीबीआई कोर्ट के जज बीएच लोया की मौत की एसआईटी जांच से जुड़ी सभी अपीलों को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है.


सीजेआई बोले- जस्टिस जोसेफ के नाम पर पुनर्विचार होने में कुछ गलत नहीं
पूरे मामले में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा ने कहा कि इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति के वारंट पर कोई स्टे नहीं लगेगा. अगर सरकार जस्टिस जोसेफ के नाम पर पुनर्विचार करना चाहती है, तो इसमें कुछ गलत नहीं है.


रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर लगाए आरोप
उधर, केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद के मुताबिक, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलिजियम से जस्टिस जोसेफ के नाम पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है. केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पूरे मामले को लेकर कांग्रेस पर ही आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा, “देश के कई जज जस्टिस जोसेफ से सीनियर हैं. कांग्रेस का रिकॉर्ड सबको पता है. जस्टिस जोसेफ से 41 जज सीनियर हैं.”




जस्टिस जोसेफ को ड्रॉप करने के पीछे केंद्र ने दिए ये तर्क
कॉलेजियम की ओर से भेजी गई लिस्ट में जस्टिस जोसेफ का नाम सबसे पहले और दूसरे नंबर पर इंदु मल्होत्रा का नाम था. लेकिन, केंद्र ने इंदु मल्होत्रा के नाम पर मुहर लगाई. इसके पीछे सरकार ने तर्क दिया कि:-
वरिष्ठता के आधार पर जस्टिस के. एम. जोसेफ का नंबर 42वां है. अभी भी हाईकोर्ट के करीब 11 जज उनसे सीनियर हैं.


कलकत्ता, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और कई हाईकोर्ट के अलावा सिक्किम, मणिपुर, मेघालय के प्रतिनिधि अभी सुप्रीम कोर्ट में नहीं है.


जस्टिस के. एम. जोसेफ केरल से आते हैं, अभी केरल के दो हाईकोर्ट जज सुप्रीम कोर्ट में हैं.


पिछले काफी समय से सुप्रीम कोर्ट में SC/ST का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है.


कॉलेजियम सिस्टम सुप्रीम कोर्ट का ही एक सिस्टम है.


अगर केरल के ही एक और हाईकोर्ट जज की नियुक्ति की जाती है तो यह सही नहीं होगा.


विवाद के बीच कल शपथ लेंगी इंदु मल्होत्रा
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने कॉलेजियम की ओर से भेजी गई लिस्ट से नामों को अलग करने के फैसले में सीजेआई दीपक मिश्रा को लूप में नहीं रखा. केंद्र ने न तो इंदु मल्होत्रा का नाम फाइनल करने से पहले सीजेआई से चर्चा की और न ही उनसे कोई सलाह ली. सरकार के इस एकतरफा फैसले से सुप्रीम कोर्ट के कई जज नाराज हैं. खासकर कि वो जज जो कॉलेजियम का हिस्सा भी रहे हैं. बता दें कि इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति पत्र पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने साइन कर दिए हैं. वह शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगी.


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