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इरम आगाकेंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत का मानना है कि SC/ST एक्ट में संशोधन के खिलाफ सोमवार को देशभर में भड़की हिंसा जल्द ही खत्म हो जाएगी. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री गहलोत के मुताबिक, जैसे ही प्रदर्शनकारियों को अहसास होगा कि इसमें विरोध करने जैसा कुछ नहीं है, वो हिंसा रोक देंगे. केंद्रीय मंत्री ने इस प्रदर्शन की तुलना संजय लीला भंसाली की विवादित फिल्म ‘पद्मावत’ की रिलीज के दौरान भड़की हिंसा से की है. उन्होंने कहा, “जैसे ही राजपूतों ने फिल्म देखी, उन्हें मालूम चला कि इसमें रानी पद्मावती का खराब चित्रण नहीं किया गया है और फिर उन्होंने प्रदर्शन बंद कर दिए.”
‘पद्मावत’ से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि दलितों को जल्द ही अहसास होगा कि वे पीएम नरेंद्र मोदी इस मामले में उनके साथ हैं. बता दें कि SC/ST एक्ट में संशोधन के खिलाफ सोमवार को विभिन्न संगठनों ने भारत बंद बुलाया था. इस दौरान भड़की हिंसा में 10 लोगों की मौत हो गई. इस मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इसपर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया है.
गहलोत ने न्यूज 18 की इरम आगा से भारत बंद मुद्दे को लेकर बात की.भारत बंद ने हिंसक रूप ले लिया. आप चिंतित हैं कि इससे SC/ST के बीच सरकार की गलत छवि बनेगी?
SC/ST बड़ी संख्या में बीजेपी में शामिल हैं. अगर हम दलित बैकग्राउंड से संसद और विधानसभा के प्रतिनिधियों की संख्या देखें तो मालूम चलेगा कि बीजेपी को उनका सपोर्ट है. कुछ राजनीतिक पार्टियां सोचती हैं कि दलित उनके साथ हैं. उन्होंने इस बारे में झूठी कहानियां और भ्रांतियां फैलाई हैं, लेकिन तथ्य यह है कि दलित समाज हमारे साथ है. दूसरी पार्टियां कितनी ही कोशिश कर लें, सच दबाया नहीं जा सकता.
लेकिन विरोध प्रदर्शनों का क्या?
लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाराज हैं. लेकिन सरकार ने कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की है और हम विरोध कर रहे लोगों को मना लेंगे. यह पद्मावत फिल्म के दौरान हुए प्रदर्शनों जैसा है. लोगों ने फिल्म के विरोध में प्रदर्शन किया. जैसे ही फिल्म रिलीज हुई, उन्हें अहसास हुआ कि इसमें विरोध करने जैसा कुछ नहीं है. इस मामले में भी ऐसा ही है. लोगों को जल्द ही अहसास होगा कि सरकार उनके साथ है और प्रदर्शन व हिंसा करने का कोई मतलब नहीं.
क्या ये प्रदर्शन राजनीतिक रूप से प्रेरित है? मायावती ने कहा कि अगर सरकार सही समय पर एक्शन लेती तो ऐसा नहीं होता.
करीब 8 दिन पहले मैंने मीडिया के जरिए कहा था कि सरकार इस मामले में रिव्यू पिटीशन दायर करने वाली है. हमने कहा था कि सरकार इस मामले में कुछ करेगी और सड़कों पर उतरने की कोई ज़रूरत नहीं है. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दलितों के अधिकार सुरक्षित हैं. उनका हक और हित बना रहेगा. SC/ST को दिए गए सभी संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जाएगी
मैंने यह भी कहा था कि प्रदर्शन करने की कोई जरूरत नहीं है. लेकिन इसके बावजूद यह सब हो रहा है. ज़रा देखिए इसे, दूसरी पार्टियों के नेता इस प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे हैं. यह साफ करता है कि प्रदर्शन राजनीति से प्रेरित हैं.
राहुल गांधी के मुताबिक, दलितों की उपेक्षा करना बीजेपी और आरएसएस के डीएनए में है. आपको इस बारे में क्या कहना है?
मैं कांग्रेस से कुछ पूछना चाहता हूं. सबसे पहले एससी/एसटी प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटी एक्ट 1989 का कांग्रेस से कुछ लेना-देना नहीं है. यह वीपी सिंह के वक्त में लाया गया था, जिन्हें 1989 में बीजेपी का सपोर्ट था.
दूसरा, बाद में यह मालूम चला कि इस एक्ट में कुछ कमियां हैं. कांग्रेस ने इसे सुधारने के लिए क्या किया?
तीसरा, 1997 में एससी/एसटी के आरक्षण को लेकर एक फैसला लिया गया था, जो दलित समुदाय के खिलाफ था.
उस सरकार को बीएसपी और सपा का समर्थन था. अगर वे चाहते तो रिव्यू पिटीशन फाइल कर सकते थे. आईके गुजराल और एचडी देवगौड़ा के वक्त ऐसा किया जा सकता था. लेकिन कोई पिटीशन नहीं फाइल की गई. 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने और इसमें संशोधन किए गए.
वे बीआर अंबेडकर का सम्मान नहीं करते, उन्हें वीपी सिंह के वक्त भारत रत्न दिया गया था. नरेंद्र मोदी सरकार ने अब रिव्यू पिटीशन दायर की है, जबकि कांग्रेस ने ऐसा क्यों नहीं किया? मोदी सरकार ने दलित समाज के लिए वित्तीय भत्तों में भी सुधार किया है.
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