Thursday, 26 April 2018

राजीव के दौरे से बहुत अलग है मोदी-जिनपिंग की मुलाकात, ये हैं वजह


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(ज़ाका जैकब)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की होने वाली मुलाकात को चीनी मीडिया ने बेहद अहम माना है. गुरुवार देर रात चीन के वुहान शहर पहुंचे पीएम मोदी शुक्रवार-शनिवार के 6 बार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे. मोदी के दौरे की तुलना 1988 में हुए राजीव गांधी के चीन दौरे से की जा रही है. तब 1962 के भारत-चीन युद्ध के 26 साल बाद राजीव ने चीनी नेता डेंग ज़ियाओपिंग से मुलाकात कर दोनों देशों के रिश्तों में आई खटास को दूर करने की कोशिश की थी.


हालांकि, CNN-News18 सीनियर एडिटर और एंकर ज़ाका जैकब इससे इत्तेफाक नहीं रखते. उनका कहना है कि पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात की तुलना राजीव गांधी और डेंग ज़ियाओपिंग की मीटिंग से नहीं की जानी चाहिए. पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात को लेकर अपना नज़रिया रख रहे हैं सीनियर एडिटर और एंकर ज़ाका जैकब…


भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के चीन दौरे पर हैं. इस दौरान कई बार उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी. पीएम मोदी के दो दिन के अनौपचारिक दौरे और वुहान में चीनी राष्ट्रपति से मुलाकात की तुलना दिसंबर 1988 में तत्कालीन भारतीय पीएम राजीव गांधी और चीन के सर्वोच्च नेता डेंग ज़ियाओपिंग की मुलाकात से की जा रही है. बेशक दोनों मुलाकातों में काफी समानताएं हैं. लेकिन, अगर वुहान में होने जा रहे अनौपचारिक सम्मेलन को 1988 में हुए राजीव गांधी के दौरे के नज़रिये से देखा जाए, तो ये एक बड़ी गलती होगी.


इसी तरह भारत और चीन के बीच पिछले साल जून में डोकलाम विवाद हुआ. 72 दिन तक दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने रहीं. सितंबर में यह विवाद खत्म होने का दावा किया गया. हालांकि, इस पर अभी भी तनातनी जारी है. पीएम मोदी के इस दौरे से माना जा रहा है वह डोकलाम विवाद को दूर करने की कोशिश करेंगे. राजीव का दौरा भी अनौपचारिक था. मोदी का दौरा भी अनौपचारिक है.


अपने दो दिन की चीन यात्रा पर मोदी और जिनपिंग विभिन्न द्विपक्षीय मसलों पर बात करेंगे. दो मुलाकातों के दौरान दोनों पक्षों के 6 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और उच्च पदस्थ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे. इस मुलाकात का मकसद यही है कि मोदी-जिनपिंग एक-दूसरों के नज़रिये से वाकिफ हो सके, ताकि आने वाले वक्त में भारत और चीन के रिश्तों में बदलाव और सुधार आए.


राजीव गांधी ने 1988 में जब अपने ऐतिहासिक दौरे की शुरुआत की थी, तब वो बोफोर्स घोटाले में घिरे हुए थे. वीपी सिंह ने कहा था कि राजीव गांधी ने भारतीय मीडिया में नकारात्मक खबरों को दरकिनार करने के लिए ही चीन का दौरा किया था. 1954 के बाद से ये पहला मौका था जब कोई भारतीय पीएम चीन के दौरे पर गए हो.


वहीं, कठुआ और उन्नाव रेप मामलों और SC/ST एक्ट में बदलाव को लेकर मोदी सरकार भी घिरी हुई है. लेकिन, इसके बाद भी मोदी-जिनपिंग की मुलाकात और 1988 में हुई राजीव-डेंग की मीटिंग को एक ही नज़रिये से नहीं देखा जाना चाहिए.


दरअसल, विदेश मंत्रालय (एमईए) के अधिकारियों के मुताबिक, राजीव गांधी के दौरे से पीएम मोदी की चीन यात्रा की तुलना इसलिए भी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि दोनों समय और संदर्भ के लिहाज से पूरी तरह से अलग हैं.


क्या भारत और चीन अपनी सीमा विवादों को सुलझाने के लिए बड़े स्तर पर आपसी सहमति और अपने-अपने देशों के हितों को ध्यान रखकर कदम बढ़ाने की उम्मीद कर रहा है? मौजूदा हालात और तमाम जटिलताओं को देखते हुए खासकर तब जब भारत का पड़ोसी देश चीन यह नहीं चाहता कि भारत और चीन की दोस्ती और गहरी हो.


ये वक्त चीन-भारत के आपसी संबंधों का नया अध्याय लिखने का वक्त है. कुछ नए समझौते करने का समय है. लेकिन, ये समझौते व्यापक समझ पर आधारित होने चाहिए.


अब देखना दिलचस्प होगा कि वुहान के ईस्ट लेक के किनारे बात करने के दौरान दोनों नेता ये समझ दिखा पाते हैं या नहीं.


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