Sunday, 1 April 2018

NDA-UPA के लिए खतरे की घंटी! 2019 में राष्ट्रीय ताकत बनेंगी क्षेत्रीय पार्टियां


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(भावदीप कांग)साल 2019 में होने वाले आम चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां रणनीति बनाने में जुट गई हैं. देखा गया है कि अब तक चुनावों में दो ही बड़ी पार्टियां प्रमुख तौर सामने आई हैं. लेकिन, इस बार लोकसभा चुनाव कुछ अलग होने वाला है. सीनियर जर्नलिस्ट भावदीप कांग आम चुनाव 2019 को लेकर अपना नज़रिया रख रहे हैं. उनके मुताबिक, 2019 के चुनाव में द्विध्रुवीय राजनीतिक आधार टूटेंगे. दूसरे शब्दों में, ऐसा लग नहीं रहा कि अब सिर्फ दो गठबंधनों को ही सत्ता पर कब्जा करने का मौका मिलेगा.


सीनियर जर्नलिस्ट भावदीप कांग इसके पक्ष में दो कारण बताते हैं. पहला, दो दशक से जो दो गठबंधन (एनडीए और यूपीए) चले आ रहे थे. लेकिन, अब ये लंबे समय तक नहीं आ रहे. साल 2014 से कांग्रेस के बुरे दिन शुरू हुए हैं. इसके बाद देखा गया है कि बीजेपी में नेतृत्व करने वाले नेता ज्यादातर क्षेत्रीय बलों से आए हैं. इसलिए तेलंगाना सीएम के चंद्रशेखर राव (केसीआर) का यह कहना गलत नहीं है कि मौजूदा हालात में देश में बहुध्रुवीय व्यवस्था की संभावनाएं बन रही है.


गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और कुछ मामलों में कर्नाटक के 125 सीटों पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर है. अगर बात करें, गठबंधन की, तो दोनों पार्टियां महाराष्ट्र, पंजाब और झारखंड में सीधा मुकाबला करेंगी. वहीं, दूसरी 300 सीटों पर क्षेत्रीय दलों का दबदबा है. इनमें तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल की सीटें शामिल हैं.दूसरा कारण यह है कि कांग्रेस अभी भी राष्ट्रीय पार्टी है. साल 2014 के चुनाव में पार्टी ने 10.7 करोड़ वोट हासिल किए थे, जबकि बीजेपी को 17.2 करोड़ वोट मिले थे. ऐसे में ये तर्क दिए जाते हैं कि भारतीय राजनीति अभी भी द्वि-ध्रुवीय है. हालांकि, 2014 से बीजेपी एक के बाद एक सीटों पर जीत हासिल करती जा रही है.


(लेखक सीनियर जर्नलिस्ट हैं और यह उनके निजी विचार हैं.)

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