Monday, 2 April 2018

कर्नाटक चुनाव: BJP को जिताने के लिए RSS का एक्शन प्लान


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डीपी सतीशप्रणेश की उम्र 60 साल से ज्यादा है और वो आरएसएस के फुलटाइम स्वयंसेवक हैं. इन दिनों वो बीजेपी के लिए प्रचार में व्यस्त हैं. प्रणेश सुबह-सुबह मतदाताओं और बीजेपी के स्थानीय नेताओं से मिलने के लिए दक्षिण बेंगलुरु पहुंच जाते हैं. न्यूज़ 18 से बात करते हुए प्रणेश ने कहा कि उन्होंने 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए बड़े पैमाने पर कैंपेन किया था और अब पार्टी के लिए फिर से वोट मांग रहे हैं.


उन्होंने आगे कहा, “बीजेपी एक स्वतंत्र राजनीतिक दल है. कभी-कभी हम उन्हें पार्टी या किसी विशेष उम्मीदवार के लिए प्रचार करने में मदद करते हैं. 2014 में भी हम उनके साथ थे. हम कर्नाटक में कांग्रेस को हराना चाहते हैं. पिछले पांच सालों में दो दर्जन से ज्यादा आरएसएस कार्यकर्ता मारे गए हैं. कांग्रेस सरकार ने हत्यारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है.”


प्रणेश के मुताबिक, वो एक दिन में कम से कम 30-40 मतदाताओं से मिलते हैं. छुट्टियों और सप्ताहांत के दौरान छोटी मीटिंग्स का भी आयोजन करते हैं. उन्होंने कहा कि कभी-कभी वो बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ जाते हैं लेकिन ज्यादातर वो अकेले प्रचार करते हैं.राज्य के एक बीजेपी नेता ने न्यूज 18 को बताया कि राज्य में हर बूथ पर आरएसएस का कम से कम एक कार्यकर्ता होगा. “कर्नाटक में 55,000 से ज्यादा मतदान केंद्र है. वे हर जगह मौजूद हैं. किसी दूसरे राजनीतिक दल के पास आरएसएस जैसा कोई कैडर नहीं हैं. इसका हमें फायदा मिलता है.”


प्रदेश के बीजेपी प्रमुख बीएस येदियुरप्पा के मुताबिक उम्मीदवारों के चयन के दौरान भी बीजेपी आरएसएस से सलाह लेती है. उन्होंने कहा “कुछ सीटों पर आरएसएस ने बीजेपी के कुछ उम्मीदवारों का विरोध किया हमने उन्हें सुना है.”


त्रिपुरा में धमाकेदार जीत के एक दिन बाद आरएसएस ने बेंगलुरु में अपने राज्य मुख्यालय में एक इमरजेंसी मीटिंग का आयोजन किया था. इस बैठक में चुनाव के लिए रणनीति पर बात की गई. इस बैठक में बीजेपी के कुछ नेताओं को भी बुलाया गया था. बैठक में भाग लेने वाले एक नेता ने कहा कि हर कोई काफी उत्साहित था. कर्नाटक में हालात को देखते हुए आरएसएस ने कहा है कि वो हर बूथ पर काम करेंगे.


न्यूज 18 से बात करते हुए राज्य के एक बीजेपी नेता ने कहा, “आरएसएस हमेशा चुनाव लड़ने में हमारी मदद करता है. पहली बार आरएसएस ने कर्नाटक विधानसभा चुनावों में बूथों का प्रबंधन करने का फैसला लिया है. ये हमारे लिए एक बड़ी राहत की बात है. पहले वो अलग तरीके से हमारी मदद करते थे”


राज्य के कुछ आरएसएस नेताओं का तर्क है कि सिद्धारमैया सरकार को संघ और उसके सहयोगी हिन्दू विरोधी सरकार के तौर पर देखती है.


एक नेता ने कहा “वास्तव में हम कर्नाटक में कांग्रेसी नेताओं के खिलाफ नहीं हैं. वे भी अच्छे हिंदू हैं और आरएसएस को गाली नहीं देते हैं. व्यक्तिगत रूप से उनके खिलाफ हमारी कोई लड़ाई नहीं है. लेकिन सिद्धारमैया अलग है वो कम्युनिस्ट की तरह काम करते हैं और हम उनके विचारों को पसंद नहीं करते हैं. इसलिए हम उन्हें कर्नाटक से हर हाल में बाहर करना चाहते हैं”


आरएसएस ने बीजेपी को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और दलित वोट को तोड़ने के लिए कहा है. ये वो वोट हैं जो सिद्धारमैया के साथ बड़ी संख्या में जा सकते हैं.


आरएसएस के एक दूसरे कार्यकर्ता का मानना है कि ओबीसी और अल्पसंख्यकों के बीच सिद्धारमैया की अच्छी पैठ है. उन्होंने कहा “यहां तक कि अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति उनके खिलाफ नहीं हैं. सिद्धारमैया को हराना बीजेपी के लिए आसान नहीं होगा. हम भ्रष्टाचार को मुख्य मुद्दा नहीं बना सकते बीजेपी पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं. इसलिए हम चीजों को ठीक से मैनेज करना चाहते हैं. आरएसएस के सारे स्वयंसेवक बीजेपी को वोट देते हैं. लेकिन बीजेपी के सारे मतदाता आरएसएस से नहीं हैं. इसलिए ये जरूरी है कि हर बूथ पर हमारे अपने लोग हो.”


आरएसएस ने बीजेपी से ये भी कहा है कि वो चुनाव में उनके कार्यकर्ताओं की हत्या को भी बड़ा मुद्दा बनाए. आरएसएस के शीर्ष तीन नेताओं में से एक दत्तात्रेय होसबोले कर्नाटक से ही है. वो शिमोगा जिले के होसाबोल गांव से हैं. इसी गांव से येदियुरप्पा और ईश्वरप्पा भी आते हैं. वो अपने गृह राज्य के चुनाव में एक बड़ी भूमिका निभाएंगे क्योंकि वो यहां के लोगों और जाति के समीकरण से अच्छी तरह वाकिफ हैं.


नागपुर के मुख्यालय में आरएसएस के टॉप नेताओं के साथ बैठक के दौरान, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें कहा है कि कर्नाटक में बीजेपी को निश्चित तौर पर जीत मिलेगी.


तटीय कर्नाटक, मुंबई-कर्नाटक, मालनाड़ और बेंगलुरु शहर में आरएसएस काफी संख्या में मौजूद है. लेकिन पुराने मैसूर और हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्रों में आरएसएस के कार्यकर्ताओं की संख्या ज्यादा नहीं है.

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