Monday, 2 April 2018

क्या देवगौड़ा और मायावती का गठबंधन टूटने की कगार पर पहुंच गया है?


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((डीपी सतीश))जनता दल (सेक्यूलर) सोमवार की शाम पार्टी प्रमुख एचडी देवगौड़ा के गृह क्षेत्र हासन में एक विशाल रैली करने जा रही है. लेकिन इस रैली में जेडीएस की सहयोगी दल बहुजन समाजवादी पार्टी की प्रमुख मायावती भाग नहीं लेंगी.


हासन में पिछले हफ्ते कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक रैली की थी. लिहाजा जेडीएस ने भी बड़ी रैली का ऐलान किया है. इस रैली में कम से कम 3-4 लाख लोगों के भाग लेने की संभावना है.


लेकिन इस रैली में मायावती की अनुपस्थिति से कर्नाटक की राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है. कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि मायावती गोरखपुर और फुलपुर में सपा-बसपा की जीत के बाद कर्नाटक को लेकर में चुप्पी साध ली है.कर्नाटक विधानसभा चुनावों में बीएसपी ने जेडीएस के साथ गठबंधन कर कांग्रेस को हैरान कर दिया था. 1996 के बाद पहली बार मायावती ने किसी भी राज्य में चुनाव से पहले गठबंधन किया था.


जेडीएस ने इस गठबंधन को बड़ी उपलब्धि कहा था. साथ ही जेडीएस ने विधानसभा में कुल 224 सीटों में से उन्हें 20 सीट देने की पेशकश की थी. ऐलान के एक हफ्ते बाद मायावती और जेडीएस सुप्रीमो और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा ने बेंगलुरू में एक विशाल संयुक्त रैली को संबोधित किया था. इस रैली में इन दोनों ने कहा था कि वो एक साथ मिल कर कर्नाटक में कांग्रेस शासन का अंत करेंगे.


कांग्रेस ने उन्हें खुले तौर पर बीजेपी का एजेंट कहा था. कांग्रेस ने आरोप लगाए थे कि वोट काटने के लिए जेडीएस और बीएसपी ने हाथ मिलाए हैं.


गोरखपुर और फूलपुर में जीत के एक महीने बाद मायावती ने कर्नाटक और कांग्रेस के बारे में बात करना बंद कर दिया.


कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का तर्क है कि मायावती ने अब महसूस किया है कि कर्नाटक में जेडीएस के साथ गठबंधन से बीजेपी को फायदा हो सकता है. लिहाजा मायावती कर्नाटक में  अब जेडीएस से हाथ मिलाने के लिए तैयार नहीं है.


जेडीएस के साथ गठबंधन को लेकर बीएसपी के कर्नाटक इकाई के नेता खासे परेशान थे.


पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “बहनजी ने हमसे बिना सलाह लिए फैसला कर लिया था. उस वक्त हमें चुप रहना पड़ा. कर्नाटक और यूपी में हमारी बड़ी दुश्मन बीजेपी है, कांग्रेस नहीं, हम जेडीएस पर भरोसा नहीं करते.”


जेडीएस को लोग ऊंची जाति की पार्टी मानती है. जबकि बीएसपी दलितों की पार्टी है. दिलचस्प बात ये है कि गठबंधन के एक महीने बाद भी बीएसपी ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की है.


मायावती की अनुपस्थिति के बारे में न्यूज़ 18 से बात करते हुए, देवगौड़ा ने कहा कि वो अगली रैली में भाग लेंगी और गठबंधन बरकरार है.


बसपा कर्नाटक इकाई का कहना है कि उनके नेता का अगला कदम क्या होगा. इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है क्योंकि सभी निर्णय लखनऊ में लिए जाते हैं.


Article source: http://feedproxy.google.com/~r/ndtvkhabar/~3/oUEESAbDPJ8/story01.htm

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