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अशप्रीत सेठीकेंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि कांग्रेस जैसा कमजोर विपक्ष लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है. न्यूज़18 से बातचीत के दौरान गडकरी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को इम्मेच्योर लीडर भी कहा. न्यूज18 से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कहा “राहुल गांधी बच्चों की तरह आधारहीन बाते करते हैं. इस समय राहुल गांधी को मेच्योर लीडर की तरह व्यवहार करना चाहिए और एक मजबूत विपक्ष के नेता के तौर पर सामने आना चाहिए.”
गडकरी ने कहा राहुल गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सोनिया गांधी की तरह मेच्योर नहीं है. राहुल गांधी की इम्मेच्योर बातों की वजह से कांग्रेस अपना अस्तित्व खोती जा रही है. गडकरी ने 2019 चुनावों में बीजेपी की सत्ता में वापसी को लेकर भी पूरा विश्वास जताया. गडकरी ने कहा कि उन्हें सौ प्रतिशत विश्वास है कि 2019 में बीजेपी सत्ता में आएगी.
हाल ही में कर्नाटक में सभी विपक्षी पार्टियों के एकजुट होकर शक्ति प्रदर्शन करने को लेकर नितिन गडकरी ने कहा कि विपक्षियों को बीजेपी का धन्यवाद देना चाहिए क्योंकि आज बीजेपी की वजह से ही ये सारे दल एक साथ खड़े हैं. गडकरी ने कहा बीजेपी और मोदी जी के डर से सभी विपक्षी पार्टियां एकजुट हुई है. विपक्षी पर्टियों में मोदी जी और बीजेपी का डर छाया हुआ है.बीजेपी की सहयोगी पार्टियां जैसे शिवसेना, अकाली दल और जेडी(यू) के बारे में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि राजनीति में कभी भी कोई परमानेंट दोस्त या दुश्मन नहीं होता है. बीजेपी अपने कमजोर विपक्ष से कहीं ज्यादा मजबूत है. सभी दल बीजेपी के डर से ही एकजुट होकर खड़े हैं.
बीजेपी एक ऐसी पार्टी है जो जाति, समुदाय और लिंग से ऊपर सामाजिक, आर्थिक और न्याय की राजनीति करने में विश्वास रखती है. यूनियन मिनिस्टर ने कहा कि पंजाब के अलावा कांग्रेस के पास अपना कोई राज्य नहीं बचा है. कर्नाटक में भी कांग्रेस ने जेडीएस के सहयोग से ही सरकार बनाई है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने देश में राज किया है लेकिन आज कांग्रेस कहां है?
कर्नाटक के बारे में उन्होंने कहा कि कर्नाटक में भी बीजेपी ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है कांग्रेस दूसरे नंबर की पार्टी है. लगातार बढ़ते तेलों के दामों को लेकर गडकरी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि ईंधन को जीएसटी के तहत लाने का समय आ गया है.
गडकरी के इस विचार पर महाराष्ट्र सीएम ने भी सहमति जताते हुए कहा कि पूरा समय आ चुका है कि ईंधन को जीएसटी के अंतर्गत रखा जाए. विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन को जीएसटी के अंतर्गत रखने पर तेलों के दामों में तेजी से कमी आएगी.
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