Tuesday, 1 May 2018

इटैलियन ​फिल्म देखकर सत्यजीत रे ने तय किया था कि वो फिल्मकार बनेंगे


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भारतीय सिनेमा को पाथेर पांचाली, अपराजितो, चारुलता और द वर्ल्ड आॅफ जैसी शानदार फिल्में देने वाले फिल्मकार सत्यजीत रे का आज जन्मदिन है. रे ने न सिर्फ भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पॉपुलर बनाया, बल्कि ​कई फिल्मकारों को अपने काम से प्रेरित भी किया. हॉलीवुड डायरेक्टर क्रिस्टोफर नोलान ने हाल ही में सत्यजीत रे की फिल्म ‘पाथेर पांचाली’ को फिल्म मेकिंग के इतिहास में बेस्ट फिल्म बताया था. क्रिस्टोफर नोलान ने जब सत्यजीत रे की ये फिल्म देखी तो उनके मन में भारतीय सिनेमा के बारे में और ज्यादा जानने की इच्छा जागी. उन्होंने पाथेर पांचाली को सिनेमा का मास्टर पीस बताया.बचपन में स्केचिंग में रुचि थी: बचपन में सत्यजीत रे की स्केचिंग में रुचि थी लेकिन जैसे-जैसे वो बड़े हुए उनकी रुचि बदलती गई. पहले वह क्लासिकल म्यूजिक सीखने लगे और फिर एक ऐड कंपनी में आर्टिस्ट की नौकरी कर ली. फिल्में देखना उन्हें पसंद था तो जब भी वह काम के सिलसिले विदेश जाते, वहां खूब फिल्में देखते. पाथेर पांचाली बनाने की ​प्रेरणा उन्हें यहीं से मिली थी. रे जब इटैलियन फिल्म ‘बाईसाइकल थीव्स’ देखने गए तो उन्होंने तय किया कि वो फिल्मकार बनेंगे.


satyajit ray


सत्यजीत रे

बस फिल्म निर्देशक नहीं, सेट डिजाइनर भी: उनकी फिल्म ‘अपू ट्रायलॉजी’ को वर्ल्ड सिनेमा की बेहतरीन फिल्मों में से एक माना जाता है. रे की सबसे खास बात ये थी कि वो बस फिल्म निर्देशक ही नहीं थे, बल्कि म्यूजिक कंपोजर, कैलीग्राफर, फिक्शन राइटर, सेट-ग्राफिक डिजाइनरऔर फिल्म क्रिटिक भी थे. उन्होंने न सिर्फ भारतीय फिल्मकारों बल्कि मार्टिन स्कॉरसेसे, जेम्स आइवरी, फांसिस फोर्ड कोपोला और अकीरा कुरोसावा जैसे इंटरनेशनल फेम के डायरेक्टर्स को भी प्रेरित किया.


pather panchali


फिल्म पाथेर पांचाली का एक सीन

उनकी कहानियों से प्रेरित हैं कई हॉलीवुड फिल्में: फिल्म पाथेर पांचाली बनाने में रे को काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ा. इसकी शूटिंग के लिए फंड जुटाने के लिए सत्यजीत रे को अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखने पड़े थे. इतनी दिक्कतों का सामना करके बनी ये फिल्म सिनेमा का माइलस्टोन मानी जाती है. हॉलीवुड की कई फिल्मों के बारे में कहा जाता है कि ये फिल्में सत्यजीत रे की फिल्मों या कहानियों से ​प्रेरित हैं. इनमें ‘टैक्सी ड्राइवर’, ‘फोर्टी शेड्स ऑफ ब्लू’, ‘E.T. द एक्सट्रा टेरेस्ट्रअल’ जैसी फिल्में शामिल हैं।


एकेडमी अवॉर्ड को बताया था सबसे बड़ा अचीवमेंट: सत्यजीत रे जब साल 1983 में अपनी फिल्म घरे बायरे पर काम कर रहे थे इसी दौरान उन्हें हार्ट अटैक आया और इसके बाद वो लंबे समय तक ​बीमार रहे. घरे बायरे उन्होंने अपने बेटे की मदद से साल 1984 में पूरी की. बीमारी से उबरने के बाद रे ने तीन फिल्में बनाईं, जिन्हें ज्यादातर इंडोर में शूट किया गया था. लेकिन इन फिल्मों को रे की बाकी फिल्मों की तरह प्रशंसा नहीं मिली.


satyajit ray


सत्यजीत रे

इस दौरान उन्होंने गणशत्रु, शाखा प्रोशाखा, आगंतुक बनाई थी. आगंतुक उनके जीवन की आखिरी फिल्म थी. इस फिल्म में उत्पल दत्त ने अभिनय किया था. साल 1992 में रे की तबीयत फिर से खराब हुई और उन्हें अस्पताल में एडमिट होना पड़ा. मृत्यु के 24 दिन पहले सत्यजीत रे ने एकेडमी अवॉर्ड हाथों में लिया. इस वक्त वह गंभीर रूप से बीमार थे. उन्होंने इस अवॉर्ड को हाथों में लेकर इसे अपने फिल्म मेकिंग करियर का बेस्ट अचीवमेंट बताया. सत्यजीत रे उस वक्त और अब तक पहले ऐसे भारतीय रहे जिन्हें एकेडमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.

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