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तमिलनाडु सरकार ने तूतीकोरिन स्थित स्टरलाइट प्लांट को हमेशा के लिए बंद करने का आदेश दिया है. तूतीकोरिन में हिंसा भड़कने के बाद हुई पुलिस फायरिंग में 13 लोगों की मौत होने की खबर आई थी. तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले में वेदांता ग्रुप की स्टरलाइट कॉपर यूनिट के खिलाफ महीनों से चल रहा प्रदर्शन के अचानक हिंसात्मक हो जाने के बाद पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी थी जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई थी और तीस से ज्यादा लोग घायल हुए थे. हिंसा भड़कने के बाद इलाके में धारा 144 लागू हो गई थी और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं.क्यों उठी थी फैक्ट्री बंद होने की मांग
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक कॉपर फैक्ट्री से हो रहे प्रदूषण के कारण यहां का ग्राउंड वॉटर भी प्रदूषित हो रहा है. इलाके में पीने के पानी की समस्या बढ़ रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस फैक्ट्री के प्रदूषण के कारण सेहत से जुड़ी गंभीर समस्या का संकट खड़ा हो गया है. हाल ही में इस कंपनी ने शहर में अपनी और यूनिट बढ़ाने की घोषणा की है. इसलिए स्थानीय लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा कॉपर फैक्ट्री को बंद करने और आगे कोई और यूनिट चालू नहीं करने की मांग की थी.
ग्राउंड वाटर हो रहा है प्रदूषित1997 में शुरू हुई यह कंपनी तूतीकोरिन में कॉपर का खनन करती है. प्लांट की यूनिट में एक स्मेल्टर, एक रिफायनरी, एक फास्फोरस एसिड प्लांट, एक कॉपर रॉड प्लांट और तीन कैप्टिव पावर प्लांट शामिल हैं. स्थानीय लोगों और पर्यावरणीय अधिकारों की रक्षा करने वाले समूहों का कहना है कि इस प्लांट की वजह से ग्राउंड वॉटर और वायु प्रदूषित हो रहा है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल ये सारा विरोध मार्च में शुरू हुआ, जब कंपनी ने कहा कि वो अपना उत्पादन 4 लाख टन से बढ़ाकर 8 लाख टन प्रति वर्ष करेगी. इसके बाद 29 मार्च को मेंटेनेस के लिए प्लांट को 15 दिनों के लिए बंद कर दिया गया. लेकिन फिर प्लांट 6 जून तक बंद रहा क्योंकि तमिलनाडु प्रदूषण बोर्ड ने पर्यावरण के नियमों का अनुपालन न करने के कारण इसे दुबारा शुरू किए जाने की अनुमति नहीं दी थी.
हालिया विरोध प्रदर्शनों के चलते पीसीबी (प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) ने कंपनी के 25 साल पुराने लाइसेंस को रिन्यू करने से मना कर दिया है. गौरतलब है कि कंपनी के लाइसेंस की समय सीमा इसी साल समाप्त हो रही है. पीसीबी ने लाइसेंस रिन्यू न करने के पीछे 6 कारण बताए हैं जिसमें से एक कारण ये भी बताया गया है कि कंपनी पर्यावरणीय मानकों को पूरा नहीं करती है.
बंद होने की कगार पर खड़ी कंपनी स्टरलाइट ने इसके विरोध में अपील की लेकिन उसे खारिज कर दिया गया. इस समय कंपनी ‘तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपीलेट अथॉरिटी’ लाइसेंस को रिन्यू किए जाने का केस लड़ रही है.
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