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देश के बंटवारे और लाखों लोगों की मौत का गुनहगार क्या युवाओं का रोल मॉडल हो सकता है. क्या मोहम्मद अली जिन्ना का कद महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के बराबर है. अगर नहीं...तो ऐसी क्या मजबूरी है जिसकी वजह से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर लगी है. बीजेपी सांसद सतीश गौतम ने AMU के यूनियन हॉल में लगी तस्वीर पर सवाल उठाए हैं .तो जिन्ना समर्थक दलील दे रहे हैं कि वो 1938 से AMU के मानक सदस्य हैं. इसलिए उस तस्वीर को हटाया नहीं जाना चाहिए .ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि बंटवारे का बीज बोने वाला खलनायक जिन्ना किसी विश्वविद्यालय के लिए नायक कैसे हो सकता है. क्या टू नेशन थ्योरी पर विश्वास करने वाला खलनायक जिन्ना भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश का हीरो हो सकता है. आज आर पार में होगी इसी मुद्दे पर देश की सबसे बड़ी बहस.
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