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समाजवादी पार्टी ने ऐलान किया है कि कैराना उपचुनाव में वह अपना उम्मीदवार उतारेगी, जिसे उत्तर प्रदेश में विपक्षी एकता के परीक्षण के रूप में देखा जा रहा है.यह फैसला पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव के नेतृत्व में हुई मीटिंग में लिया गया. 28 मई को होने वाले इस चुनाव के लिए नॉमिनेशन प्रक्रिया गुरुवार शुरू होगी. विपक्ष और बीजेपी दोनों के लिए ये काफी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह जीत 2019 के चुनाव में अपनी स्थिति को मज़बूत दिखाने के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी.
हालांकि समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सुनील सिंह साजन ने इस बात को खारिज किया कि सपा अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी और आरएलडी उम्मीदवार को समर्थन देगी. इस साल मार्च में राज्यसभा चुनावों के दौरान जो कुछ हुआ उसके बाद से समाजवादी पार्टी में संयुक्त रूप से उम्मीदवार उतारने के प्रति अनिच्छा है.
तमाम समझौते के बाद यूपी विधानसभा में आरएलडी के एकमात्र विधायक ने बसपा के बजाय भाजपा के लिए वोट दिया था और बसपा उम्मीदवार हार गया था. हालांकि इस घटना के बाद विधायक, सहेंद्र सिंह को आरएलडी से बाहर निकाल दिया गया था, लेकिन यह साफ है कि सपा फिर से आरएलडी पर भरोसा करने के करना चाहती.साजन ने कहा कि कैराना सीट के लिए सपा की दावेदारी बिल्कुल स्वाभाविक है क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में वो दूसरे स्थान पर रही थी. कैराना की सीट तब खाली हुई जब लंबी बीमारी के बाद बीजेपी के सांसद हुकुम की मौत हो गई थी. उन्होंने कहा, ”2014 में कैराना में समाजवादी पार्टी उपविजेता थी तो स्वाभाविक रूप से हम इस सीट के दावेदार हैं. अभी तक उम्मीदवार का चुनाव नहीं हुआ है लेकिन पार्टी के वरिष्ठ लोगों द्वारा जल्द ही इस पर फैसला कर लिया जाएगा.”
आगे साजन ने कहा कहा, “इस वक्त सपा और बसपा दोनों गठबंधन में हैं और कुछ बीजेपी के कुछ लोग यह फैला रहे हैं कि हमारा गठबंधन नहीं है. मुझे लगता है कि गोरखपुर और फूलपुर में हार के बाद बीजेपी डर गई हैं. हम बसपा के साथ पूरी तरह से गठबंधन में हैं.” उन्होंने आगे कहा कि अगर दूसरी पार्टियां सच में बीजेपी को हराना या संविधान को बचाना चाहती हैं तो उन्हें सपा उम्मीदवार का समर्थन करना चाहिए.
2017 के विधानसभा चुनावों में, आरएलडी उम्मीदवार थाना भवन, शामली और कैराना में तीसरे स्थान पर रहे, गंगोह में पांचवें और नाकुर में आठवें स्थान पर रहे. यहां तक कि उनके सारे वोट मिलाकर भी बसपा और सपा के वोटों से कम थे.
इसी बीच सूत्रों के बताया कि बीजेपी कैराना के मतदाताओं को रिझाने के लिए स्वर्गीय विधायक हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को मैदान में उतार सकती है. मृगांका 2017 में विधानसभा चुनावों में सपा के नाहिद हसन से 21 हजार वोटों से हार गई थीं.
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